पूर्णिया में पप्पू यादव ने बिगाड़ा राजद का खेल ! तेजस्वी के अजीबोगरीब बयान के निकल रहे मायने

डिजीटल डेस्क : पूर्णिया में पूर्व सांसद पप्पू यादव ने लोकसभा चुनाव के सियासी समर को इतना रोचक बना दिया है कि राजद खेमा को अपना पूरा खेल ही बिगड़ता हुआ अहसास होने लगा है। जमीनी स्तर पर लग रहे इस कयास को तब और बल मिला जब यहां की चुनावी सभा में राजद नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव  ने अजीबोगरीब बयान दिया। उन्होंने कहा था कि अगर आप इंडिया गठबंधन की बीमा भारती को नहीं चुनते हैं, तो आप एनडीए उम्मीदवार को चुनिए। तेजस्वी के इसी बयान से पूरे बिहार में पूर्णिया को अचानक सुर्खियों में ला दिया है।

पप्पू यादव के खिलाफ तेजस्वी के तेवर से नए कयासों को मिला बल

पप्पू यादव जिस पूर्णिया लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में हैं, वह  बिहार की राजनीति में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में है। इसके पीछे एक बड़ी वजह यह है कि यहां पर पप्पू यादव ने लालू प्रसाद यादव की नाक में दम कर दिया है। राजद किसी हाल में निर्दलीय पप्पू यादव को जीतना नहीं देखना चाहती। यही कारण है कि सोमवार को एक चुनावी सभा में तेजस्वी यादव ने लोगों को यह संकेत भी दे दिए। उन्होंने कहा कि आप इंडिया गठबंधन को चुनिए। अगर आप इंडिया गठबंधन की बीमा भारती को नहीं चुनते हैं, तो आप एनडीए उम्मीदवार को चुनिए। तेजस्वी के इस बयान के बाद से जमीनी स्तर पर मतदाताओं के बीच इसके मायने निकाले जा रहे हैं। यहां के वोटर ही राजद नेता के बयान पर कहने लगे हैं कि राजद वालों का हाल ये हो गया कि ऐसा बयान देने को मजबूर हुए हैं।

पप्पू यादव की मौजूदगी से पूर्णिया में पूरे बिहार से अलग चुनावी तस्वीर

पप्पू यादव की मौजूदगी और मतदाताओं के बीच सतत सक्रियता से पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र में पूरे बिहार से अलग सियासी तस्वीर दिखने लगी है। बिहार की अधिकांश सीटों पर महागठबंधन और एनडीए के बीच सीधा मुकाबला है, लेकिन पूर्णिया की स्थिति अलग है। पूर्णिया में पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने बतौर निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरकर दोनों गठबंधनों के समीकरण को बिगाड़ दिया है। यादव का दावा है कि उन्हें कांग्रेस का समर्थन प्राप्त है। गौर करने वाली बात है कि यहां के लोग भी एनडीए और महागठबंधन की जीत-हार के बदले यह जानने को उत्सुक हैं कि पप्पू यादव जीतेंगे या हारेंगे। लेकिन पप्पू यादव ने ये एक दिन में मुमकिन नहीं किया। यह उनकी बीते कई माह से लगातार एक रणनीति के तहत लगातार की जा रही मेहनत का परिणाम है।

पूर्णिया में 26 अप्रैल को होना है मतदान

लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में 26 अप्रैल को बिहार के सीमांचल इलाके की सीट पूर्णिया के मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर अपना जनप्रतिनिधि चुनेंगे। महागठबंधन ने यहां से राजद की नेता बीमा भारती को चुनावी मैदान में उतारा है, जबकि एनडीए की ओर से निवर्तमान सांसद जदयू के नेता संतोष कुशवाहा चुनावी रण में ताल ठोक रहे हैं। पिछले चुनाव में संतोष कुशवाहा ने कांग्रेस के उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह को बड़े अंतर से हराया था। इस चुनाव के कुछ ही दिन पहले पप्पू यादव ने अपनी जन अधिकार पार्टी के कांग्रेस में विलय कर यह साफ संकेत दे दिया था कि वे कांग्रेस के टिकट पर पूर्णिया से चुनाव लड़ेंगे। हालांकि बाद में यह सीट महागठबंधन में राजद के कोटे में चली गयी।

पप्पू खुद को बता रहे पूर्णिया का बेटा, कांग्रेस समेत अन्य सियासी खेमे से समर्थन का किया दावा

महागठबंधन से टिकट की संभावनाएं खत्म होते ही पप्पू यादव बतौर निर्दलीय चुनावी मैदान में उतर गए। पप्पू दावा करते हैं कि उन्हें न केवल कांग्रेस का बल्कि भाजपा और राजद के लोगों का भी समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि वे पूर्णिया के बेटे के तौर पर चुनावी मैदान में हैं। वह पूर्णिया में आम नागरिक की तरह चुनाव प्रचार में लगे हैं। कभी वे सड़कों पर मोटर साइकिल दौड़ाते नजर आ रहे हैं तो कभी किसी के घर चहलकदमी कर या खटिया पर बैठकर भात खाते। कुल मिलाकर पप्पू यादव ने ये सबकुछ एक दिन में नहीं किया। उम्मीदवारी का दावा ठोकने से दो-तीन महीने पहले ही उन्होंने पूर्णिया में काम शुरू दिया था। जब तक लालू की नजर में बीमा भारती आतीं या पूर्णिया में राजद अपना प्रत्याशी तय करता, उससे पहले ही पप्पू यादव ने प्रचार शुरू कर दिया था। कुल मिलाकर पूर्णिया में जो सियासी तस्वीर जमीनी स्तर पर दिख रही है, उसके मुताबिक पप्पू यादव ने चाल तो चली शतरंज के सिपाही जैसी, लेकिन अब वो वजीर के मोहरे को पीटने के करीब तक पहुंचते बताए जा रहे हैं।

पप्पू का नाम न लेकर भी हराने की रणनीति पर अकारण नहीं बोले तेजस्वी

पूर्णिया में भी बिहार के शेष 39 लोकसभा सीटों की भांति राजद के नेता तेजस्वी यादव किसी हाल में एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण में सेंधमारी को लेकर चौकन्ने हैं। चुनाव प्रचार के आखिरी मौके पर तेजस्वी ने पूर्णिया में जमकर ताकत लगाया। बताया जा रहा है कि नेपाल और बंगाल से सटे पूर्णिया में पप्पू यादव न केवल राजद के वोट बैंक में सेंधमारी को लेकर जुगत में हैं जबकि जदयू इस वोट बैंक की लड़ाई और मोदी की लहर को लेकर उत्साहित है। लोग कह रहे हैं कि इसी जमीनी हकीकत को राजद नेता ने भांपा। तभी तो तेजस्वी ने अकारण ही लोगों को सचेत नहीं किया कि किसी के धोखे में नहीं रहना है। उन्होंने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति का चुनाव नहीं है। या तो इंडिया या एनडीए।

पूर्णिया में पप्पू यादव के खिलाफ प्रचार को तैयार नहीं हुए कांग्रेस नेता

पूर्णिया में पप्पू यादव को लेकर सियासी हल्के में खम ठोंककर एक खास जानकारी साझा की जा रही है। बताया जा रहा है कि राजद ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी की चुनावी सभा कराने को लेकर कांग्रेस पर दबाव बनाया था, लेकिन कांग्रेस उसके लिए तैयार नहीं हुई। बहरहाल, पूर्णिया में पप्पू यादव के मुकाबले में उतरने से मुकाबला त्रिकोणात्मक हो गया है। यहां ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो 4 जून को परिणाम के बाद ही पता चलेगा। बहरहाल, यहां के मतदाता भी कह रहे हैं कि चर्चा में बने रहना और चुनावी अखाड़े में परचम लहराने में काफी अंतर हुआ करता है एवं यहां के चुनानी नतीजे में दिखे तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।

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