बांग्लादेश के भगोड़ा डार्क प्रिंस तारिक रहमान ने लंदन में बैठकर किया तख्तापलट ! आईएसआई ने दिया साथ

डिजीटल डेस्क : बांग्लादेश के भगोड़ा तारिक रहमान  ने लंदन में बैठकर किया तख्तापलट ! बांग्लादेश में हुए तख्तापलट के बाद लगातार 15 साल देश में हुकूमत करने वाली भारत हितैषी कही जाने वाली शेख हसीना को प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा देने के साथ ही अपना मुल्क छोड़ना पड़ा है। इस समय वह भारत की अल्पकालिक शरण में हैं। लेकिन इसी बीच तख्तापलट को लेकर तमाम बाते सामने आ रही हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यही चर्चा जोरों पर है कि इस तख्तापलट में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के एक्टिंग चेयरमैन तारिक रहमान का हाथ है और इस समय बांग्लादेशी भगोड़े के रूप में लंदन में रह रहे हैं एवं बदले हालातों में वह बांग्लादेश वापस लौट सकते हैं।

शेख हसीना की धुर विरोधी पूर्व पीएम खालिदा जिया के बेटे और बीएनपी के एक्टिंग चेयरमैन हैं तारिक

फरवरी 2018 से बीएनपी के एक्टिंग चेयरमैन का पद संभाल रहे तारिक रहमान बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जिया उर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बड़े बेटे हैं। बांग्लादेश में जब बीएनपी की सरकार थी तब तारिक रहमान का जलवा हुआ करता था। अपनी मां खालिदा जिया के बाद वह बीएनपी के सबसे ताकतवर नेता हैं। खालिदा जिया और उनकी सियासी पार्टी बीएनपी शेख हसीना और उनकी सियासी पार्टी अवामी लीग की पांरपरिक धुर विरोधी रही है। जिया उर रहमान बांग्लादेश के सातवें राष्ट्रपति थे जबकि खालिदा जिया देश की 10वीं प्रधानमंत्री थीं और बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री होने का रिकार्ड भी उन्हीं के नाम है।  20 नवंबर, 1965 को जन्मे तारिक रहमान काफी उम्र में राजनीति में आ गए थे। पाकिस्तान के कराची में उनका जन्म हुआ था और वर्ष  2018 में ढाका ग्रेनेड अटैक में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। बांग्लादेश में वह भगौड़ा घोषित हैं।

बांग्लादेशी सियासत में शेख हसीना के विरोधी खेमे जबरदस्त सियासतदां हैं तारिक

ढाका के बीएएफ शाहीन कॉलेज में प्रारंभिक पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 1980 के दशक में ढाका विश्वविद्यालय के इंटरनेशनल रिलेशंस डिपार्टमेंट में दाखिला लिया। 1991 के चुनाव से पहले उन्होंने अपनी मां बेगम खालिदा जिया के साथ देश के लगभग हर जिले में प्रचार किया और चुनाव जीता।। उनकी मां बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं और उन्होंने बोगुरा में जमीनी स्तर से नेताओं को चुनने की लोकतांत्रिक प्रक्रिया शुरू की, जहां वह बीएनपी इकाई के कार्यकारी सदस्य थे। वह वर्ष 2009 में बीएनपी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष चुने गए और धीरे-धीरे बीएनपी के पुनर्गठन में शामिल हो गए। फिर वर्ष 2018 में जब खालिदा जिया को जेल में डाला गया तो तारिक रहमान को पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में नामित किया गया था। वह तब से निरंकुश शेख हसीना के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। वर्ष 1994 में तारिक रहमान ने बांग्लादेश के पूर्व नौसेना प्रमुख और बाद की सरकारों में दो बार मंत्री रहे दिवंगत रियर एडमिरल महबूब अली खान की बेटी डॉ. जुबैदा रहमान से शादी की। ज़ुबैदा रहमान एक योग्य हृदय रोग विशेषज्ञ हैं और उन्होंने ढाका मेडिकल कॉलेज से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उनकी एक बेटी है जिसका नाम जैमा जरनाज रहमान है।

डार्क प्रिंस तारिक रहमान की फाइल फोटो
डार्क प्रिंस तारिक रहमान की फाइल फोटो

डार्क प्रिंस के नाम से मशहूर तारिक पर आईएसआई से सांठगांठ कर तख्तापलट का आरोप

बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना के बेटे साजिब वाजेद जॉय ने बड़ी बात कही है। साजिब ने कहा कि अगर बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर काबू नहीं पाया गया, तो बांग्लादेश फिर से पाकिस्तान बन जाएगा। उन्होंने साफ तौर पर पाकिस्तान पर आरोप लगाया है कि बांग्लादेश को अस्थिर करने की साजिश पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने रची है।  बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) ने कथित तौर पर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यवाहक प्रमुख तारिक रहमान (डार्क प्रिंस के नाम से मशहूर) के साथ मिलकर लंदन में शेख हसीना के खिलाफ साजिश रची थी। उनके पास सऊदी अरब में तारिक रहमान और आईएसआई अधिकारियों के बीच हुईं बैठकों के सबूत हैं। बीएनपी की यूएई यूनिट के प्रमुख जाकिर हुसैन और सेवानिवृत्त पाकिस्तानी सेना अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) शाहिद महमूद मोहम्मद शरीफ, जो दुबई में आईएसआई का एजेंट है,उनके बीच लगातार बातचीत होती रहीं और उसने तारिक रहमान और आईएसआई के नंबर वन पॉलिसी मेकर जावेद मेहदी के बीच जेद्दा में मीटिंग फिक्स की थी।

आईएसआई का खास है शाहिद महमूद मोहम्मद शरीफ और तारिक रहमान के दाऊद इब्राहिम से संबंध

बताया जा रहा है कि शाहिद महमूद मोहम्मद शरीफ 54 कोर्स का पाकिस्तानी सेना का अफसर रहा है औऱ 2004 में रिटायर हो गया था। उसके बाद से वह दुबई में है और बांग्लादेश में अपने शीर्ष अफसरों और राजनीतिक नेताओं के बीच कॉन्टैक्ट बनाने में आईएसआई उसका इस्तेमाल करती है। उसी जाकिर ने शाहिद महमूद से कम से कम 11 बार मुलाकात की थी। खुफिया एजेंसियों को दस्तावेज मिले हैं, उनमें जाकिर आईएसआई एजेंट शरीफ के साथ अपनी मुलाकात के दौरान तारिक को ‘बॉस’ कहता था और आखिरी मुलाकात के दौरान उसने आईएसआई का संदेश लंदन तक पहुंचाने का भरोसा दिया था। इस बात का भी खुलासा हुआ है कि पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान के भारतीय अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से भी रिश्ते रहे हैं। दुबई में तारिक रहमान और दाऊद इब्राहिम की कई मुलाकातें हुई हैं। यहां तक कि दोनों के बीच व्यापारिक संबंध भी रहे हैं। तारिक ने दुबई में दाऊद की एक प्रॉपर्टी भी 60 मिलियन डॉलर में खरीदी है। खुफिया एजेंसियों का कहना है कि तारिक रहमान भारत के लिए भी बड़ा खतरा है। रहमान के भगोड़े दाऊद इब्राहिम और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ घनिष्ठ संबंध हैं और उसने पहले सीआईए अधिकारियों से कहा था कि बांग्लादेश का निर्माण कभी नहीं होना चाहिए था। वह आईएसआई के इशारे पर भारत को भी अस्थिर करने की साजिशें रचता रहता है। भारत की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के सेवानिवृत्त उप महानिदेशक, मेजर जनरल गगनजीत सिंह ने पहले बताया था कि एक बार हथियारों की एक बड़ी खेप, जिनमें हथियारों से भरे 10 ट्रक बांग्लादेश के चटगांव में जब्त किए गए थे। ये हथियार भारत को अस्थिर करने के लिए यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम और मणिपुर के विद्रोही संगठनों के लिए थे।

लंदन में तारिक रहमान
लंदन में तारिक रहमान

शेख हसीना के खिलाफ दुष्प्रचार में डार्क प्रिंस तारीक ही मुख्य चेहरा रहा

बताया जा रहा है कि शेख हसीना सरकार के खिलाफ चलाए जा रहे प्रोपेगेंडा में तारीक रहमान प्रमुख चेहरा है। रहमान अपने सोशल मीडिया हैंडल से बांग्लादेश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बारे में लगातार भड़काऊ मैसेज भी पोस्ट कर रहा है। बताया जा रहा है कि शेख हसीना सरकार के खिलाफ प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी की छात्र शाखा ‘छात्र शिबिर’ को भी आईएसआई का समर्थन है। छात्र शिबिर को आतंकवाद विरोधी अधिनियम 2009 की धारा 18/1 के तहत आतंकवादी संगठन के रूप में प्रतिबंधित किया था। जमात-ए-इस्लामी भारत में भी प्रतिबंधित है और 2003 में रूस ने भी इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया था। बताया जा रहा है कि जमात-ए-इस्लामी की बांग्लादेशी छात्रों में कितनी गहरी पैठ रही है। जमात-ए-इस्लामी ने बांग्लादेश की आजादी का भी विरोध किया था। इसकी तस्दीक इस बात से की जा सकती है कि शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान की प्रतिमाओं और चित्रों को जिस तरह से नुकसान पहुंचाया जा रहा है, वह जमात-ए-इस्लामी की सोच बताता है। बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के नेतृत्व वाली पहली सरकार ने देश की स्वतंत्रता का विरोध करने और पाकिस्तानी कब्जे वाली सेनाओं के साथ सहयोग करने में अपनी भूमिका के लिए जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगा दिया था। बाद में, बंगबंधु की हत्या के बाद, सैन्य तानाशाह जनरल जियाउर रहमान ने प्रतिबंध हटा दिया, जिससे जमात-ए-इस्लामी को देश में अपनी गतिविधियां फिर से शुरू करने में मदद मिली। जमात-ए-इस्लामी के जरिए पाकिस्तानी सेना और आईएसआई का मिशन शेख हसीना को किसी भी तरह से हटा कर विरोध प्रदर्शनों और सड़क हिंसा के माध्यम से विपक्षी बीएनपी को सत्ता में वापस लाना है।  कुछ सोशल मीडिया हैंडल भी चिन्हित हुए हैं, जो शेख हसीना सरकार खिलाफ भड़काऊ पोस्ट लिख रहे थे। इनमें से एक ने तो हसीना सरकार के खिलाफ 500 से ज्यादा ऐसा पोस्ट किए थे। यह भी पता चला है कि कई पाकिस्तान ओपन सोर्स इंटेलिजेंस हैंडल भी सोशल मीडिया पर उग्र हालात के लिए भड़का रहे थे।

डार्क प्रिंस तारिक रहमान पर हैं भ्रष्टाचार के कई मामले

डार्क प्रिंस के नाम से मशहूर तारिक रहमान 2000 के दशक की शुरुआत में अपनी मां के प्रधानमंत्री बनने के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी का प्रमुख चेहरा बना। तारिक रहमान को 2013 में ढाका की एक अदालत ने पहली बार मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में बरी किया था। बाद में स्टेट की अपील के बाद उच्च न्यायालय ने उसे सात साल जेल की सजा सुनाई। पांच साल बाद फरवरी 2018 में खालिदा जिया को जिया अनाथालय ट्रस्ट भ्रष्टाचार मामले में पांच साल और तारिक को 10 साल जेल की सजा मिली। 21 अक्तूबर 2018 को एक विशेष ट्रिब्यूनल ने तारिक को 21 अगस्त 2004 को तत्कालीन विपक्षी नेता शेख हसीना की रैली पर भयानक ग्रेनेड हमले की साजिश रचने के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। उन्हें हत्या के दो मामलों और विस्फोटक अधिनियम की कई धाराओं के तहत तीन बार आजीवन कारावास और 20 साल की कैद की सजा सुनाई गई थी। 4 फरवरी, 2021 को एक अन्य अदालत ने राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के बारे में अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में नरैल में दायर मानहानि के एक मामले में तारिक को दो साल कैद की सजा सुनाई थी। उस पर 10,000 टका का जुर्माना भी लगाया गया था और भुगतान न करने पर छह महीने की अतिरिक्त जेल की सजा सुनाई गई थी।

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