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राज्य में 21 नए पालना घर होंगे स्थापित, वर्तमान में 79 का हो रहा संचालन

पटना : राज्य में कामकाजी महिलाओं के छह माह से लेकर पांच वर्ष तक के बच्चों की देखभाल और संरक्षण के लिए 79 पालना घर का संचालन हो रहा है। जल्द ही 21 नई खोलने की योजना है इसे वित्तीय वर्ष 2026-27 तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद पलना घरों की संख्या 100 हो जाएगी। मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना अंतर्गत संचालित पालना घर का उद्देश्य समाहरणालय परिसर और आसपास में कार्यरत महिला एवं पुरुष कर्मियों को कार्यालयीय अवधि में अपने बच्चों के पालन-पोषण की चिंता से मुक्त करना है।

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कुल 79 पालनाघर का संचालन किया जा रहा है

वर्तमान में राज्य के 38 पलना घर जिला मुख्यालय में, 24 जिलों के पुलिस मुख्यालय में, 09 काराओं और आठ विभागों में (समाज कल्याण पुराना सचिवालय, कारा सुधार एवं सेवाएं निदेशालय, पंचायती राज, श्रम संसाधन, गृह विभाग सरदार पटेल भवन, विधान परिषद्, बिहार लोक सेवा आयोग) में कुल 79 पालनाघर का संचालन किया जा रहा है। सभी पलना घरों का संचालन सरकारी भवनों में ही हो रहा है।

पालना घर में कामकाजी महिलओं के छह महीने से लेकर पांच वर्ष तक के बच्चों को रखने की निशुल्क व्यवस्था की गई है

पालना घर में कामकाजी महिलओं के छह महीने से लेकर पांच वर्ष तक के बच्चों को रखने की निशुल्क व्यवस्था की गई है। गौरतलब है कि बिहार सरकार नौकरी में महिलाओं को आरक्षण दे रही है, जिसके बाद कार्यालयों में महिला कर्मियों की संख्या पहले की तुलना में काफी बढ़ी है। ऐसे में उन महिलाओं के लिए छोटे-छोटे बच्चों की देखभाल करना और नौकरी करना दोनों मुश्किल होता है। ऐसे में पालना घर उनके लिए वरदान साबित होता है। यहां पर बच्चों को खेलने और पढ़ने दोनों की व्यवस्था है। इस पालना घर का निर्माण महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से किया गया है।

पालना घर योजना भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से 2024-25 में शुरू की गई एक पहल है

बता दें कि पालना घर योजना भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से 2024-25 में शुरू की गई एक पहल है। यह योजना बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास, पोषण और स्वास्थ्य देखभाल में सहायता करती है। पालना घर में छह महीने से लेकर पांच साल के बच्चों की देखरेख के लिए एक क्रेच वर्कर और एक सहायक क्रेच वर्कर हैं। बच्चों को खाना या दूध देना है, तो इंडक्शन और केटल की सुविधा भी है। जबकि पालना घर का संचालन सुबह 9:30 से लेकर शाम छह बजे तक होता है। छह महीने से एक साल के बच्चों के लिए क्रेच (शिशुगृह) है, जबकि इससे अधिक उम्र के बच्चों के लिए छोटा-सा बेड भी दिया गया है। इसमें कुल 10 बच्चों को एक साथ रखने की सुविधा है। पालना घर के दीवारों पर नंबर, अल्फाबेट से लेकर स्वर-व्यंजन अंकित किये गये हैं। जबकि बच्चों के खेलने के लिए खिलौने भी उपलब्ध हैं।

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