रांची: झारखंड में सहायक पुलिसकर्मियों की दिक्कतें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले कुछ दिनों से उनकी निगाहें सरकार की अगली कैबिनेट बैठक पर टिकी हुई हैं, जिसमें उनकी लंबित मांगों पर फैसला हो सकता है। पिछले शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में सहायक पुलिसकर्मियों की मांगों पर कोई निर्णय नहीं हुआ, जिसके बाद वे फिर से निराश हो गए हैं।
सहायक पुलिसकर्मियों की मांग है कि उनकी अनुबंध की अवधि बढ़ाई जाए और उनके काम के मानकों को सुधारने के लिए कुछ ठोस कदम उठाए जाएं। पिछले दो महीनों से वे लगातार आंदोलन कर रहे है। 29 अगस्त की कैबिनेट बैठक से उन्हें काफी उम्मीदें थीं, लेकिन इस बार भी उनकी मांगें पूरी नहीं हो पाईं।
सहायक पुलिसकर्मियों के प्रतिनिधि ने बताया कि सरकार के विधायक ने उन्हें आश्वासन दिया है कि इस बार कैबिनेट में तकनीकी समस्याओं की वजह से उनकी मांगें नहीं मानी गईं, लेकिन अगले कैबिनेट में उनकी मांग पूरी होने की उम्मीद है। सुदीप सोनू ने यह भी कहा कि वे इस मुद्दे पर उच्च अधिकारियों और डीजीपी से भी संपर्क में हैं।
सहायक पुलिसकर्मी पिछले 7 सालों से नौकरी कर रहे हैं और लगातार आंदोलनों का सामना कर रहे हैं। पिछले आंदोलनों के दौरान कई सहायक पुलिसकर्मी घायल भी हुए थे। अब उनके लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर उनकी मांगें जल्दी पूरी नहीं होती हैं तो वे आगे क्या करेंगे। उनकी अनुबंध की अवधि अगस्त के अंत में समाप्त हो रही है, जिससे उनकी स्थिति और भी कठिन हो गई है।
इस बीच, सहायक पुलिसकर्मियों ने यह भी कहा है कि वे सरकार से लगातार संपर्क में रहेंगे और अपनी मांगों के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। उनका कहना है कि वे तब तक आंदोलन करते रहेंगे जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार आगामी कैबिनेट बैठक में सहायक पुलिसकर्मियों की समस्याओं का समाधान करती है या नहीं। सहायक पुलिसकर्मियों का आंदोलन और उनकी धैर्य की परीक्षा दोनों ही आगामी कैबिनेट बैठक पर निर्भर करेंगे।


















