पश्चिम चंपारण: दिवाली का पर्व नजदीक आ चुका है और दिवाली को लेकर शिल्पकार दीप बनाने में जुटे हुए हैं। शिल्पकार मिट्टी के तरह के तरह के खिलौने, दिया इत्यादि बना कर अपने पुस्तैनी धंधे को जीवंत रखा है। पश्चिम चंपारण के अहवार कुड़िया पंचायत के किशुनदेव पंडित ने कहा कि आधुनिक युग में हमारे धंधे पर असर तो पड़ा है लेकिन दिवाली समेत कई अन्य पर्वों और पारंपरिक मौकों पर मिट्टी के दिए की जरूरत ही हमारे काम को जीवंत रखा है।
उन्होंने बताया कि मिट्टी के दिये और खिलौने बनाने के लिए सुगौली, जगन्नाथपुर और बैशखवा आदि जगहों से चिकनी मिट्टी लानी पड़ती है। उन्होंने बताया कि दिवाली और छठ पर्व के छः महीने पहले से हम तैयारियों में जुट जाते हैं और सामग्रियां एकत्रित करने लगते हैं। शिल्पकारों ने बताया कि पहले हम मिट्टी से दीप और अन्य चीजें बना कर धान के भूसा में पकाया जाता है और फिर रंग रोगन कर उसे बाजार में पहुंचाते हैं। शिल्पकारों ने बताया कि जब से राम जन्मभूमि अयोध्या में मिट्टी से बने दीप जलाये जाने लगा है अब हमें गर्व महसूस होता है और हमारे धंधे में थोड़ी सी सुधार आई है।
दीनानाथ पंडित, संजय पंडित, मोतीलाल पंडित, लाल बाबू पंडित, गणेश पंडित, अजय पंडित, आदि मिट्टी के शिल्पकारों ने बताया कि इलेक्ट्रिक वाले सामग्री विशेष कर चाइनीज सामग्री हमारे पुश्तैनी धंधे पर कुठाराघात किया है। इस लिए हम सरकार से मांग करते हैं कि हमारे धंधे को विकसित करने के लिए अनुदान आधारित लोन की सुविधा प्रदान की जाए।
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पश्चिम चंपारण से दीपक कुमार की रिपोर्ट
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