रांची: झारखंड की राजनीति में इन दिनों एक नया ड्रामा चल रहा है, और इसका केंद्र बना है इंडिया गठबंधन का एक साधारण पोस्टर। इस पोस्टर ने पूरे गठबंधन को न सिर्फ कंफ्यूजन में डाल दिया है, बल्कि शिकायत का पिटारा भी खोल दिया है। बात इतनी बिगड़ी कि मामला चुनाव आयोग तक पहुंच गया।
हुआ यूं कि इंडिया गठबंधन ने झारखंड में चुनावी अभियान के तहत अपने घटक दलों का एक पोस्टर जारी किया। इसमें कांग्रेस, जेएमएम, आरजेडी और सीपीआईएमएल जैसे घटक दलों के चुनाव चिह्न शामिल थे। लेकिन गलती तब हो गई जब सीपीआईएमएल की जगह सीपीआईएम का चिन्ह हंसिया, हथौड़ा और सितारा चिपका दिया गया।
सीपीआईएम ने इसे हल्के में नहीं लिया। पार्टी के राज्य सचिव ओम प्रकाश कुमार सीधे चुनाव आयोग पहुंच गए। उन्होंने शिकायत में लिखा कि उनकी पार्टी झारखंड में स्वतंत्र रूप से नौ सीटों पर चुनाव लड़ रही है और सीट शेयरिंग में शामिल नहीं है। ऐसे में कांग्रेस और जेएमएम द्वारा उनके चुनाव चिह्न का इस्तेमाल न सिर्फ अनुचित है, बल्कि भ्रम की स्थिति भी पैदा कर रहा है।
कौन है सीपीआई, सीपीएम और सीपीआईएमएल?
अब इस राजनीतिक मिस्ट्री को सुलझाने के लिए वामपंथी पार्टियों की पहचान समझना जरूरी हो गया है:
- सीपीआई (CPI): भारत की सबसे पुरानी कम्युनिस्ट पार्टी। इसका चुनाव चिह्न है गेहूं की बाली और हंसिया।
- सीपीआईएम (CPIM): 1964 में सीपीआई से अलग होकर बनी यह पार्टी अब देश की सबसे बड़ी वामपंथी ताकत है। इसका चुनाव चिह्न है हंसिया, हथौड़ा और एक सितारा।
- सीपीआईएमएल (CPIML): 1969 में नक्सलबाड़ी आंदोलन के बाद उभरी यह पार्टी तीन सितारों वाला लाल झंडा अपने चुनावी पहचान के तौर पर रखती है।
इंडिया गठबंधन की यह छोटी सी गलती अब बड़ी समस्या बन चुकी है। गठबंधन के भीतर घटक दलों के बीच आपसी समन्वय और संवाद की कमी साफ दिखाई देती है। चुनावी प्रचार के इस दौर में, जब हर वोट मायने रखता है, ऐसे कंफ्यूजन गठबंधन के लिए घातक साबित हो सकते हैं।
झारखंड में एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच मुकाबला पहले ही कड़ा है। एनडीए में भाजपा, आजसू, जदयू और लोजपा हैं, तो इंडिया गठबंधन के पाले में कांग्रेस, जेएमएम, आरजेडी और सीपीआईएमएल। लेकिन अब इस पोस्टर कांड ने गठबंधन को भीतर से कमजोर कर दिया है।
कहावत है, जितने लोग, उतनी बातें—झारखंड में अब यही कहावत इंडिया गठबंधन पर सटीक बैठती है। लगता है, चुनाव आयोग से शिकायत के बाद गठबंधन के नेताओं को यह सबक जरूर मिला होगा कि पोस्टर छापने से पहले फैक्ट चेक करना न भूलें।


















