IIIT Ranchi Student Protest: ट्रिपल आईटी रांची में प्रथम वर्ष के छात्र आदित्य की मौत के बाद शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन सोमवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। छात्र-छात्राएं हॉस्टल की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था में कथित लापरवाही को लेकर संस्थान के निदेशक प्रो. राजीव श्रीवास्तव के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। सोमवार को चेयरपर्सन छात्रों से बातचीत करने पहुंचे, लेकिन प्रदर्शन स्थल से करीब 50 मीटर की दूरी पर ही गतिरोध पैदा हो गया। चेयरपर्सन आगे बढ़ना चाहते थे, जबकि छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे। बातचीत शुरू होने से पहले ही वहां हंगामे की स्थिति बन गई।
भूखे पेट धरने पर बैठे छात्र, मेस में नहीं बना खाना
प्रदर्शनकारी छात्रों के अनुसार, प्रबंधन ने 12 अक्टूबर को सुबह 11 बजे चेयरपर्सन और निदेशक के साथ बैठक कराने का आश्वासन दिया था। तय समय पर बातचीत नहीं होने से छात्रों का आक्रोश बढ़ गया। छात्रों ने बताया कि 11 अक्टूबर को खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच के दौरान मेस में खाना नहीं बना था। सोमवार को भी भोजन नहीं मिलने के कारण वे सुबह से भूखे पेट धरने पर बैठे रहे। प्रदर्शन में शामिल छात्राओं ने कहा कि जब तक चेयरपर्सन प्रदर्शन स्थल पर आकर उनसे बातचीत नहीं करते, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। छात्रों का कहना है कि प्रबंधन जांच कराने की बात कह रहा है, लेकिन मामले की पूरी जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

पुलिस ने सड़क जाम हटाने की अपील की
प्रदर्शन स्थल पर प्रशासन की टीम और पुलिसकर्मी मौजूद रहे। अधिकारियों ने छात्रों को समझाने और स्थिति सामान्य करने का प्रयास किया। पुलिस ने सड़क जाम हटाने की अपील करते हुए कहा कि इससे आम लोगों, एंबुलेंस और अन्य वाहनों के आवागमन में परेशानी हो रही है। पुलिसकर्मियों ने छात्रों से कैंपस के भीतर प्रदर्शन करने को कहा, लेकिन छात्र निदेशक के इस्तीफे और प्रबंधन की जवाबदेही तय करने की मांग पर अड़े रहे।

क्या है आदित्य की मौत का मामला?
ट्रिपल आईटी रांची में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) के प्रथम वर्ष के 20 वर्षीय छात्र आदित्य की 10 अक्टूबर की रात खेलगांव हाउसिंग स्थित हॉस्टल में मौत हो गई थी। वह बिहार के पूर्णिया जिले का रहने वाला था। उसका शव ब्लॉक-1 की पांचवीं मंजिल पर स्थित कमरा नंबर 504बी में मिला था। जानकारी के अनुसार, साथियों ने कमरे का दरवाजा तोड़कर आदित्य को अंदर देखा और उसे नीचे लाने का प्रयास किया। इसके बाद आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे। परिजनों और विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि बिजली कटने के दौरान लिफ्ट बंद थी, एंबुलेंस में ड्राइवर और ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं थी तथा मेडिकल स्टाफ भी उपलब्ध नहीं था। उनका दावा है कि इन परिस्थितियों के कारण समय पर इलाज मिलने में देरी हुई। वहीं, संस्थान के निदेशक प्रो. राजीव श्रीवास्तव ने पहले कहा था कि छात्र को 10 मिनट के भीतर अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने एंबुलेंस में आवश्यक सुविधाओं की कमी की जानकारी नहीं होने की बात कही थी और किसी भी अनियमितता की पुष्टि होने पर जांच कराने का आश्वासन दिया था।
पिता ने दर्ज कराई प्राथमिकी, NHRC ने लिया संज्ञान
आदित्य के पिता विष्णुदेव कुमार राय ने खेलगांव थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। उन्होंने संस्थान के निदेशक और प्रबंधन के अन्य कर्मियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है। प्राथमिकी में हॉस्टल की आपातकालीन व्यवस्था और निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के पालन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने भी संज्ञान लेते हुए जांच की बात कही है। फिलहाल, छात्र निदेशक के इस्तीफे और संस्थान की जवाबदेही तय करने की मांग पर आंदोलन जारी रखे हुए हैं। मामले में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था से जुड़े आरोपों की जांच के बाद ही लापरवाही के संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


















