औरंगाबाद: डॉक्टर को धरती का भगवान कहा जाता है और लोग अपनी जान बचाने के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं लेकिन क्या हो जब धरती का वह भगवान ही किसी की जान ले ले। ऐसा ही कुछ मामला सामने आया है औरंगाबाद से जहां डॉक्टरों की वजह से दो मरीज की जान चली गई। मामला सामने आने के बाद डीएम ने तीन सदस्यीय जांच टीम बनाई है वहीं पुलिस की जांच के बाद अब सात आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
मामला औरंगाबाद के सदर अस्पताल का है जहां अस्पताल में भर्ती दो मरीजों को अस्पताल के उपाधीक्षक ने झाड़ियों में फेंकवा दिया जिसके बाद इलाज न मिलने की वजह से दोनों की मौत हो गई। 12 नवंबर को बारुन थाना क्षेत्र में जब स्थानीय लोगों ने शव झाड़ियों में शव देखा तो पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर जब पुलिस पहुंची और जांच की तो पाया कि दोनों शव सदर अस्पताल के चादर में लिपटा हुआ है। सदर अस्पताल में पूछताछ करने पर किसी ने कुछ नहीं बताया।
पुलिस ने मामले में छानबीन करते हुए जब सीसीटीवी की जांच की तो पाया कि दोनों ही मरीजों को अस्पताल के कर्मियों ने ही एंबुलेंस में डाला और कहीं ले कर गए हैं। सीसीटीवी फूटेज के आधार पर पुलिस ने सदर अस्पताल के एंबुलेंसकर्मी, स्ट्रेचरमैन से पूछताछ की तो एंबुलेंसकर्मी हरेन्द्र कुमार ने बताया कि सदर अस्पताल के उपाधीक्षक ने उसे कहा था कि दोनों को कहीं बाहर छोड़ आओ। उपाधीक्षक के कहने पर उसने एंबुलेंस में दोनों को डाल कर निकला और एक को उसने पोखराही गांव और टेंगरा नहर के पास झाड़ी में फेंक दिया।
मामला सामने आने के बाद डीएम ने डीडीसी, एसीएमओ और जिला कल्याण पदाधिकारी की एक टीम बनाई। टीम ने मामले की गहनता से जांच की और मामला सही पाया गया। जांच रिपोर्ट के बाद अब पुलिस ने बारुन थाना में सदर अस्पताल डॉ आशुतोष कुमार, स्वास्थ्य प्रबंधक हेमंत राजन, सुपरवाइजर शैलेश कुमार मिश्रा, एंबुलेंस के एमईटी हरेंद्र, एंबुलेंस के ड्राईवर शिवशंकर और दो स्ट्रेचरमैन सुरंजन और धर्मपाल के विरुद्ध मामला दर्ज किया है।
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