रांची: झारखंड हाईकोर्ट में सोमवार को शिक्षा विभाग से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई हुई। जस्टिस आनंदा सेन की अदालत ने राज्य सरकार से मंईयां सम्मान योजना के तहत अब तक खर्च की गई राशि और लाभार्थियों की संख्या की जानकारी मांगी है।
अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य की मुख्य सचिव व्यक्तिगत रूप से इस संबंध में शपथ पत्र दाखिल करें। यह मामला रतन देवी की याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने अपने पति राजशेखर तिवारी, जो चतरा जिले में लाइब्रेरियन थे, के बकाया भुगतान का मुद्दा उठाया है।
तिवारी को वर्ष 1999 से 2022 तक करीब 18.68 लाख रुपए का भुगतान नहीं किया गया। चतरा के जिला शिक्षा पदाधिकारी ने इस बकाया राशि को स्वीकार किया है और इसे सरकार से आवंटन न होने का कारण बताया है।
प्रार्थी के वकील ने अदालत को बताया कि सरकार के पास जरूरी भुगतान के लिए धनराशि नहीं है, जबकि मंईयां सम्मान जैसी योजनाओं में डीबीटी के माध्यम से मुफ्त राशि बांटी जा रही है।
इस पर अदालत ने सरकार से इन योजनाओं पर खर्च और लाभार्थियों की संख्या की विस्तृत जानकारी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 6 फरवरी को निर्धारित की गई है। इस दौरान सरकार को मंईयां सम्मान और अन्य सामाजिक कल्याण योजनाओं की पूरी जानकारी अदालत में प्रस्तुत करनी होगी।







