Bihar की ग्रामीण सड़कें भी होंगी चकाचक, इस क्षेत्र में 2182 सड़कों को किया जा रहा दुरुस्त…

पटना: मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क सुदृढ़ीकरण एवं प्रबंधन कार्यक्रम के तहत पटना प्रमंडल की कुल 2,182 सड़कों को दुरुस्त किया जाएगा। इन सड़कों की कुल लंबाई लगभग 4,116 किलोमीटर है और इसके सुदृढीकरण पर कुल 3,677 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।

Bihar के इन ग्रामीण सड़कों के सुदृढीकरण को लेकर जिलेवार आंकड़ों की बात करें तो सबसे अधिक पटना जिले की सड़कें इसमें शामिल हैं। इसमें पटना की कुल 553 सड़कें शामिल हैं और इसकी कुल लंबाई 792.931 किमी है। वहीं नालंदा जिले की 434 सड़कों को दुरुस्त करने का फैसला लिया गया है। जिसकी कुल लंबाई 667.319 किमी है। इसी तरह भोजपुर जिला के 341 पथों की, जिसकी कुल लंबाई 691.751 किमी है, को दुरुस्त किया जा रहा है। जबकि बक्सर जिला की 294 पथ, जिसकी लंबाई 595.586 किमी है, को सुदृढ़ किया जाएगा।

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रोहतास जिला की 366 पथों की मरम्मती की जाएगी। रोहतास जिला में मरम्मत वाली सड़कों की कुल लंबाई 933.827 किमी बताई गई है। वहीं कैमूर जिला की कुल 194 पथों को भी सुदृढ़ किया जाएगा। कैमूर में सड़कों की लंबाई 435.162 किमी है। ग्रामीण सड़कों का सुदृढीकरण मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क उन्नयन योजना का ही हिस्सा है। जिसे विगत वर्ष 14 नवंबर को Bihar राज्य मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिल चुकी है। इसका उद्देश्य राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों का दीर्घकालिक सुदृढ़ीकरण एवं प्रबंधन सुनिश्चित करना है।

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31 मार्च, 2024 तक पंचवर्षीय रूटीन अनुरक्षण व त्रुटि निवारण अवधि से बाहर हो चुके राज्य के कुल 13,943 ग्रामीण पथों की पहचान की गई है। जिनकी कुल लंबाई 24,313 किलोमीटर है। इन सड़कों को इस वर्ष जून तक पॉटलेश करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके पश्चात मौजूदा वित्तीय वर्ष में इन सभी सड़कों को सरफेस लेयर तक सुदृढ़ किया जाएगा। ताकि इनके स्थायित्व और गुणवत्ता में वृद्धि हो सके।

इस कार्यक्रम के तहत इन सड़कों का सात वर्ष में दो बार कालीकरण भी किया जाएगा। ताकि उसकी सतह मजबूत बनी रहे और राइडिंग क्वालिटी में कोई कमी न हो। साथ ही, सभी संवेदकों को ‘रूरल रोड रिपेयर व्हीकल’ रखने का निर्देश दिया गया है, जिससे टूटी हुई ग्रामीण सडकों की तुरंत मरम्मत की जा सके। विभाग यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि हर वित्तीय वर्ष के बाद पंचवर्षीय अनुरक्षण अवधि से बाहर हुए पथों की पहचान कर उन्हें फिर से उन्नत किया जा सके। सरकार के इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर न केवल बेहतर यात्रा अनुभव हो, बल्कि राज्य में सड़क निर्माण के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव भी देखने को मिलेगा।

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