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2025 विधानसभा चुनाव : धानुक समाज की हुंकार, कहा- अब वादा नहीं, सत्ता में हिस्सा चाहिए!

बेगूसराय : 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस बार धानुक समाज सिर्फ एक मतदाता बनकर नहीं, बल्कि एक निर्णायक शक्ति के रूप में उभर रहा है। जिसकी अगुवाई फिल्मकार और समाजसेवी एन मंडल कर रहे हैं। उनकी बुलंद आवाज गांव से लेकर राजधानी तक राजनीतिक बदलाव की एक नई पटकथा लिख रही है। मंडल का स्पष्ट संदेश है कि अब भागीदारी नहीं, हिस्सेदारी चाहिए। वादों से नहीं, अब सीटों से बात होगी। जो समाज की बात करेगा, वही राज करेगा।

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धानुक समाज व EBC शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सत्ता इन चारों क्षेत्रों में वंचित हैं – एन मंडल

उन्होंने जोर देकर कहा कि आजादी के 78 साल बाद भी धानुक समाज और अन्य अति पिछड़ा वर्ग (EBC) शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सत्ता इन चारों क्षेत्रों में वंचित हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हमें अब भी सिर्फ गिनती में रखा जाएगा? क्या अब भी समाज को सिर्फ वोट बैंक समझा जाएगा। एन मंडल ने साफ किया कि 2025 का चुनाव सिर्फ सरकार बदलने का नहीं, बल्कि सत्ता में धानुक समाज की हिस्सेदारी तय करने का चुनाव होगा। उनका कहना है कि हम कोई रहम के पात्र नहीं हैं, हम जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व के अधिकारी हैं। अब ‘हिस्सा दो, नहीं तो गद्दी छोड़ो’ का समय है।

मंडल द्वारा Facebook और X पर साझा किया गया एक पोस्ट पूरे राज्य में वायरल हो गया है

हाल ही में एन मंडल द्वारा फेसबुक और ट्विटर पर साझा किया गया एक पोस्ट पूरे राज्य में वायरल हो गया है। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा कि अब भागीदारी नहीं, हिस्सेदारी चाहिए। आजादी के 78 साल बाद भी ना शिक्षा में न्याय, ना रोजगार में अवसर, और ना ही सत्ता में भागीदारी। अब धानुक समाज सिर्फ वोट नहीं देगा, सीट मांगेगा। जो हमारी बात करेगा, हम उसी के साथ खड़े होंगे। जिसको हजारों लाइक्स, शेयर्स और कमेंट्स के साथ यह पोस्ट धानुक युवाओं के बीच एक नई चेतना जगा रहा है।

धानुक समाज के कई संगठन अब राजनीतिक चेतना और एकता के एक नए दौर में प्रवेश कर चुके हैं

धानुक समाज के कई संगठन अब राजनीतिक चेतना और एकता के एक नए दौर में प्रवेश कर चुके हैं। सुपौल, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, मधुबनी, दरभंगा, मधेपुरा, सहरसा, बेगूसराय, बाढ़ और पटना जैसे जिलों में लगातार बैठकों, जातीय जागरण यात्राओं और सामाजिक संवाद का दौर चल रहा है। मंडल इस अभियान के सांस्कृतिक और सामाजिक चेहरे बन गए हैं। उन्होंने कहा कि हम किसी के विरोध में नहीं, पर अब बिना प्रतिनिधित्व के समर्थन नहीं। हमारी नीति साफ है अब सत्ता में हमारी उपस्थिति होनी चाहिए।

धानुक समाज का नया नारा गूंज रहा है- ‘हिस्सा दो, नहीं तो गद्दी छोड़ो और ‘एकता, धानुकता व विजयता’

एन मंडल ने जो मुख्य मुद्दे उठाए हैं उनमें जातीय जनसंख्या आधारित प्रतिनिधित्व, हर विधानसभा क्षेत्र में योग्य उम्मीदवार, पंचायत से लेकर सचिवालय तक हिस्सेदारी, शिक्षा, तकनीकी और प्रतियोगिता परीक्षाओं में प्राथमिकता, और सरकारी योजनाओं में आरक्षण व प्राथमिक लाभ शामिल हैं। धानुक समाज में अब एक नया नारा गूंज रहा है, हिस्सा दो, नहीं तो गद्दी छोड़ो और ‘एकता, धानुकता व विजयता’। मंडल के सशक्त नेतृत्व और इस जागरूकता अभियान को देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि आने वाले चुनावों में धानुक समाज बिहार के राजनीतिक समीकरणों को बदलने की क्षमता रखता है।

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अजय शास्त्री की रिपोर्ट

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