पटना : बिहार में विपक्ष के नेता व पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के सरकारी आवास पर शनिवार यानी 12 जुलाई को होने वाली महागठबंधन की बैठक में घटक दलों के नेता साझा घोषणा-पत्र पर विचार-विमर्श करेंगे। बैठक के एजेंडे में कई विषय हैं, जिनमें घोषणा-पत्र सर्वाधिक प्रमुख है। इधर, के महीनों में अपनी घोषणाओं और उनके क्रियान्वयन से नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली राजग सरकार महागठबंधन को मुद्दों पर हथियार-विहीन करती जा रही है। ऐसे में महागठबंधन के समक्ष एक ऐसा साझा घोषणा-पत्र जारी करने की चुनौती बन गई है, जिसमें सभी वर्ग-समाज को संतुष्ट करने वाला हो।

घोषणा-पत्र में सभी घटक दलों के प्रमुख मुद्दे समाहित होंगे
आपको बता दें कि घोषणा-पत्र में सभी घटक दलों के प्रमुख मुद्दे समाहित होंगे। गुरुवार को हुई साझा घोषणा-पत्र उप समिति की बैठक में इस पर सहमति बनी। इन मुद्दों में राजद और कांग्रेस के मुद्दों को वरीयता मिलना तय है। वे मुद्दे प्रत्यक्ष लाभ व नकदी हस्तांतरण से संबंधित हैं, जिनके प्रति जनता का सहज आकर्षण संभव है। उनमें माई-बहिन मान योजना के अंतर्गत मासिक 2500 रुपए का भुगतान, सामाजिक पेंशन राशि को बढ़ाकर 1500 रुपए करने, 200 यूनिट नि:शुल्क बिजली, 500 रुपए में गैस-सिलेंडर देने के साथ भू-हदबंदी कानून को प्रभावी बनाने और निषाद समाज को अनुसूचित जाति की श्रेणी में सम्मिलित करने के आश्वासन होंगे।
तेजस्वी की अध्यक्षता में महागठबंधन की यह 5वीं बैठक होगी
तेजस्वी की अध्यक्षता में महागठबंधन की यह पांचवीं बैठक होगी। इसमें समन्वय समिति के साथ उसकी उप-समितियों के सदस्यों की उपस्थिति अपेक्षित है। पिछली बैठक 12 जून को हुई थी, जिसमें साझा आंदोलन पर सहमति बनी थी। तय हुआ था कि घटक दल अपनी पसंदीदा सीटों की सूची तेजस्वी को सौंपेंगे। उस निर्णय के अनुरूप ही मतदाता-सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरुद्ध महागठबंधन का आंदोलन हुआ। विधानसभा चुनाव के क्रम में सम्मिलित रूप से महागठबंधन का यह पहला आंदोलन रहा।
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महागठबंधन की पिछली 4 बैठकें
1. 17 अप्रैल को पहली बैठक में समन्वय समिति के गठन का निर्णय हुआ था। उसकी कमान तेजस्वी को मिली थी।
2. 24 अप्रैल को दूसरी बैठक में समन्वय समिति में 21 सदस्यों के साथ पांच उप-समितियां बनाने का निर्णय हुआ।
3. 4 मई को हुई तीसरी बैठक में प्रखंड और पंचायत स्तर तक समन्वय समिति के गठन पर सर्व-सम्मति बनी थी।
4. 12 जून को चौथी बैठक में घटक दलों द्वारा सीटों की सूची राजद को सौंपने व साझा आंदोलन पर सहमति बनी।
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