झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC द्वारा महिला पर्यवेक्षिका नियुक्ति पर रोक लगाई। कोर्ट ने पूछा, स्नातक शर्त के बाद ‘प्रतिष्ठा’ कैसे जोड़ी गई। अगली सुनवाई 15 सितंबर को।
रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने महिला पर्यवेक्षिका (Female Supervisor) की नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। गुरुवार को जस्टिस आनंद सेन की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने कहा कि जब विज्ञापन में सिर्फ “स्नातक उत्तीर्ण महिला” की शर्त दी गई थी तो डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद “स्नातक प्रतिष्ठा” (Honours) की डिग्री कैसे अनिवार्य की जा सकती है। अदालत ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से विस्तृत जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित की है।
Key Highlights
हाईकोर्ट ने महिला पर्यवेक्षिका नियुक्ति प्रक्रिया पर लगाई रोक
JSSC से पूछा कि “स्नातक” की जगह “स्नातक प्रतिष्ठा” कैसे जोड़ा गया
444 महिला सुपरवाइजर पदों पर हो रही थी भर्ती प्रक्रिया
डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद कई अभ्यर्थियों को बाहर किया गया
अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी
ज्ञात हो कि बाल कल्याण विभाग ने 444 महिला सुपरवाइजर की नियुक्ति के लिए अधियाचना JSSC को भेजी थी। इसके आधार पर लिखित परीक्षा आयोजित हुई और सफल अभ्यर्थियों का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन भी कर लिया गया था। लेकिन इसके बाद JSSC ने स्नातक प्रतिष्ठा की डिग्री को अनिवार्य बताते हुए सामान्य स्नातक वाले अभ्यर्थियों को रिजल्ट से बाहर कर दिया।

अभ्यर्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार ने दलील दी कि विज्ञापन और नियमावली में कहीं भी “प्रतिष्ठा” शब्द का उल्लेख नहीं था। ऐसे में चयन प्रक्रिया के बाद अतिरिक्त शर्त जोड़ना अनुचित है। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी पद को केवल महिलाओं के लिए आरक्षित करना भी सवालों के घेरे में है।
महिला पर्यवेक्षिकाओं की नियुक्ति लंबे समय से लंबित है। इनका काम आंगनबाड़ी केंद्रों की मॉनिटरिंग करना और लाभुकों तक सरकारी योजनाओं की सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है। नई नियुक्तियों से केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की निगरानी को गति मिलेगी।
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