Ranchi-झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में जमीन से जुड़े मामले में दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई. इस दौरान कांके सीओ की ओर से अदालत से बिना शर्त माफी मांग ली गई.
अदालत ने बिना शर्त मांगी गई इस माफी को स्वीकार करते हुए 26 नवंबर को दिए गए अपने आदेश को वापस ले लिया. इसके पहले अदालत ने कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने पर अंचलाधिकारी दिवाकर सी द्विवेदी को पद के लिए योग्य नहीं बताते हुए काम करने पर रोक लगा दी थी. अदालत ने पूर्व में सुनवाई के दौरान अंचलाधिकारी को 12 एकड़ जमीन की म्यूटेशन रेंट रसीद की जांच कर आदेश पारित करने का निर्देश दिया था. लेकिन अंचलाधिकारी ने आवेदन पर बिना सुनवाई किए ही प्रार्थी का आवेदन रद्द कर दिया था. इस पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई थी और कहा कि वे इस पद पर काम करने योग्य नहीं है.
बता दें कि कांके प्रखंड के सुगनू मौजा में 12 एकड़ जमीन की म्यूटेशन रेंट रसीद 1996 तक श्रेय कुमार के पिता के नाम से कट रही थी. लेकिन 1996 में पिता की मृत्यु के बाद 1997 से रसीद कटनी बंद हो गई. उस समय श्रेय कुमार नाबालिग थे. बाद में दो जुलाई 2020 को प्रार्थी श्रेय कुमार ने हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर म्यूटेशन रेंट रसीद बहाल करने का आग्रह किया. जिसके बाद कोर्ट ने एक अक्टूबर 2020 को प्रार्थी को कांके सीओ के समक्ष दोबारा आवेदन देने को कहा. इसके साथ ही कांके सीओ को इस मामले में दोनों पक्ष को सुनने के बाद उचित आदेश पारित करने का निर्देश दिया था, लेकिन अंचलाधिकारी ने बगैर प्रार्थी का पक्ष सुने ही आदेश पारित कर दिया. इसके खिलाफ कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई थी.
कोर्ट के आदेश पर अमल करते हुए याचिकाकर्ता ने छह अक्टूबर 2020 को सीओ के सामने अभ्यावेदन दिया. लेकिन अंचलाधिकारी ने इस अभ्यावेदन पर सुनवाई नहीं की और छह हफ्ते बाद इसे खारिज कर दिया. जिसके बाद हाईकोर्ट ने कांके सीओ को तीन सितंबर 2021 को अवमानना का नोटिस जारी किया. इस पर सीओ ने 18 अक्टूबर को शो काज का जवाब दिया, लेकिन कोर्ट अंचलाधिकारी के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ.
रिपोर्ट- प्रोजेश


