सुप्रीम कोर्ट ने सारंडा जंगल को सेंक्चुरी घोषित करने में देरी पर झारखंड सरकार को फटकार लगाई। 8 अक्टूबर तक अधिसूचना नहीं तो मुख्य सचिव जेल जाएंगे।
Supreme Court on Saranda Sanctuary नई दिल्ली/रांची: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को सारंडा जंगल को अभयारण्य घोषित करने में हो रही देरी पर कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि निर्धारित समय सीमा में अधिसूचना जारी न करना न केवल आदेश की अनदेखी है बल्कि अवमानना भी है। इस पर अब कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को 8 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।
Supreme Court on Saranda Sanctuary:
चीफ जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने बुधवार को इस मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता परमेश्वर गवे ने तर्क दिया कि झारखंड सरकार सीमा निर्धारण का बहाना बनाकर अधिसूचना को लगातार टाल रही है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं कर रही।
Key Highlights:
सुप्रीम कोर्ट ने सारंडा को सेंक्चुरी घोषित करने में देरी पर झारखंड सरकार को फटकार लगाई।
कोर्ट ने कहा- समयसीमा का पालन न करना अवमानना है।
मुख्य सचिव को 8 अक्टूबर को कोर्ट में पेश होने का आदेश।
अधिसूचना जारी न करने पर मुख्य सचिव को जेल भेजने की चेतावनी।
एमिकस क्यूरी ने सरकार पर आदेश की अनदेखी का आरोप लगाया।
कोर्ट ने कहा- सरकार सुप्रीम कोर्ट के साथ छल कर रही है।
कोर्ट ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार न केवल आदेश को टाल रही है बल्कि सुप्रीम कोर्ट के साथ छल भी कर रही है। खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि 29 अप्रैल के आदेश की अवमानना हो रही है।
Supreme Court on Saranda Sanctuary:
कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि 8 अक्टूबर तक सारंडा को सेंक्चुरी घोषित करने की अधिसूचना जारी नहीं हुई तो मुख्य सचिव को जेल भेजा जाएगा। साथ ही कोर्ट ने पूछा कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।
Supreme Court on Saranda Sanctuary:
इस सख्त रुख के बाद राज्य सरकार पर तत्काल अधिसूचना जारी करने का दबाव बढ़ गया है। पर्यावरणविदों और स्थानीय संगठनों का कहना है कि सारंडा जंगल को अभयारण्य घोषित करना जैव विविधता संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है।


















