Supreme Court Verdict: दो नामों से बिहार-झारखंड पुलिस में नौकरी करने वाले पूर्व सिपाही की बर्खास्तगी बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने दो अलग-अलग नामों से बिहार और झारखंड पुलिस में नौकरी पाने वाले पूर्व सिपाही रंजन कुमार की बर्खास्तगी को सही ठहराया, आपराधिक कार्रवाई के निर्देश।


Supreme Court Verdict रांची: Supreme Court of India ने झारखंड पुलिस के पूर्व सिपाही रंजन कुमार की बर्खास्तगी को सही ठहराते हुए Jharkhand High Court की खंडपीठ के फैसले को रद्द कर दिया है। अदालत ने माना कि रंजन कुमार ने दो अलग-अलग नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर झारखंड और बिहार पुलिस में नौकरी हासिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आपराधिक कार्रवाई शुरू करने का भी निर्देश दिया है।

जस्टिस Ahsanuddin Amanullah और जस्टिस R. Mahadevan की पीठ ने यह फैसला झारखंड सरकार की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका पर सुनाया। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के 25 अगस्त 2022 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें रंजन कुमार को राहत देते हुए उसकी बर्खास्तगी रद्द कर दी गयी थी।

Supreme Court Verdict: फॉरेंसिक जांच में खुला दोहरी पहचान का खेल

रिकॉर्ड के अनुसार रंजन कुमार की नियुक्ति 18 मई 2005 को झारखंड police में सिपाही के पद पर हुई थी। वह गढ़वा जिले में तैनात था। दिसंबर 2007 में छुट्टी पर जाने के बाद वह ड्यूटी पर वापस नहीं लौटा।

आरोप है कि इसी दौरान उसने बिहार पुलिस में संतोष कुमार नाम से दूसरी नौकरी हासिल कर ली। बिहार पुलिस में उसने अपना नाम संतोष कुमार और पिता का नाम कामता शर्मा बताया था, जबकि झारखंड पुलिस में वह रंजन कुमार और पिता कामता सिंह के नाम से कार्यरत था।

जांच के दौरान दोनों जगह इस्तेमाल की गयी तस्वीरें एक ही व्यक्ति की पायी गयीं। फिंगरप्रिंट, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड और तस्वीरों के आधार पर पुष्टि हुई कि रंजन कुमार और संतोष कुमार एक ही व्यक्ति हैं। जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पिता के नाम और उपनाम बदलकर अलग पहचान बनाने की कोशिश की गयी थी।


Key Highlights

  • सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सिपाही की बर्खास्तगी को सही ठहराया

  • दो अलग-अलग नामों से बिहार और झारखंड पुलिस में नौकरी का मामला

  • हाईकोर्ट का राहत देने वाला आदेश रद्द

  • फिंगरप्रिंट और बायोमेट्रिक जांच में खुला फर्जीवाड़ा

  • बिहार और झारखंड पुलिस को आपराधिक कार्रवाई के निर्देश


Supreme Court Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश पलटा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विभागीय अधिकारियों ने उपलब्ध दस्तावेजों, तस्वीरों और जांच रिपोर्ट के आधार पर उचित निष्कर्ष निकाला था। अदालत ने माना कि पुलिस जैसी अनुशासित सेवा में ईमानदारी और सत्यनिष्ठा सर्वोपरि है।

पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए विभागीय कार्रवाई को वैध ठहराया और बर्खास्तगी के आदेश को सही माना।

Supreme Court Verdict: बिहार पुलिस की नियुक्ति भी रद्द, आपराधिक केस के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने 26 दिसंबर 2007 को बिहार पुलिस में संतोष कुमार के नाम से हुई नियुक्ति को भी रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि मामला केवल विभागीय अनुशासन का नहीं बल्कि धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जीवाड़े से जुड़ा है।

पीठ ने बिहार और झारखंड के डीजीपी को निर्देश दिया कि मामले की जांच कर कानून के अनुसार आपराधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाये।

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