रांची. झारखंड हाईकोर्ट में कोर्ट फीस में बढ़ोतरी को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान झारखंड स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष राजेंद्र कृष्णन ने सरकार की ओर से पेश किए गए राजस्व आंकड़ों पर सवाल खड़े किए हैं।
हाईकोर्ट में हुई सुनवाई
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में काउंटर एफिडेविट दायर कर बताया कि वर्ष 2011-12 में कोर्ट फीस से प्राप्त राजस्व लगभग 97 करोड़ रुपये था, जबकि यह आंकड़ा 2020-21 तक घटकर महज 10 करोड़ रुपये रह गया। सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि पिछले 15 वर्षों में न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या चार गुना तक बढ़ चुकी है।
बार काउंसिल ने उठाए गंभीर सवाल
बार काउंसिल के अध्यक्ष ने कहा, “यदि केसों की संख्या लगातार बढ़ रही है तो कोर्ट फीस से मिलने वाले राजस्व में इतनी भारी गिरावट कैसे संभव है?” उन्होंने मांग की कि यदि सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़े सही हैं तो इस पर गंभीर जांच होनी चाहिए।
बार काउंसिल ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार राजस्व में गिरावट को आधार बनाकर कोर्ट फीस बढ़ा रही है, जबकि असल में प्रक्रिया में खामी हो सकती है, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।
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