नेशनल मूवमेंट फ़ॉर ओल्ड पेंशन की पहल
- ओल्ड पेंशन के पक्ष में गोलबंद हो सरकार को चुनाव पूर्व वायदे की दिलायी गयी याद
- शेयर बाजार पर आधारित और कर्मचारी विरोधी है नयी अंशदायी पेंशन
- जेएमएस के घोषणा पत्र में शामिल था ओल्ड पेंशन का वादा
Gumla– ओल्ड पेंशन की मांग – नयी पेंशन प्रणाली की जगह पुरानी पेंशन लागू कराने को लेकर शिक्षक और कर्मचारियों ने पेंशन यात्रा निकाली है. नेशनल मूवमेंट फ़ॉर ओल्ड पेंशन स्कीम के बैनरतले हजारों की संख्या में विभिन्न विभागों को कर्मियों ने परमवीर अल्बर्ट एक्का स्टेडियम से जुलूस की शुरुआत कर पूरे शहर का भ्रमण किया. इसके बाद मुरली बगीचा स्थित माध्यमिक शिक्षक संघ भवन पहुंच कर सभा में तब्दील हो गया.
संघ भवन कर्मियों को संबोधित करते हुए को संगठन के संयोजक सुमित कुमार नंद ने नेशनल पेंशन सिस्टम की खामियां और ओल्ड पेंशन स्कीम की खूबियां गिनाते हुए कहा कि वर्ष 2004 के बाद सरकारी नौकरियों में आए कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद दी जाने वाली पुरानी पेंशन व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया.
पुरानी पेंशन व्यवस्था में कर्मचारी के रिटायरमेंट की तिथि के अंतिम वेतन के आधार पर गारंटीड पेंशन और उस पर महंगाई राहत का प्रावधान था, नयी अंशदायी पेंशन पूरी तरह से शेयर बाजार पर आधारित और कर्मचारी विरोधी है. इसको लेकर शिक्षक कर्मचारियों और अधिकारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है.
2018 से नेशनल मूवमेंट फ़ॉर ओल्ड पेंशन लड़ रही है इसकी लड़ाई
नेशनल मूवमेंट फ़ॉर ओल्ड पेंशन स्कीम वर्ष 2018 से ही इसकी लड़ाई लड़ रही है. यह हमारे संघर्ष का ही देन है कि एनपीएस में सरकारी अंशदान दस प्रतिशत से बढ़ा कर चौदह फ़ीसदी किया गया, ग्रेच्युटी व पारिवारिक पेंशन की व्यवस्था पुनर्बहाली हुई. लेकिन ओल्ड पेंशन जैसे अहम मसले पर अब तक कामयाबी नहीं मिल पायी. जबकि झामुमो ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में इसे लागू करने का वादा किया था. अब सरकार इस मामले में टालमटोल कर रही है.
मौके पर शिक्षक नेता विजय बहादुर सिंह, निरंजन कुमार, जीवन नाथ तिवारी, मंगलेश्वर, प्राण गोविंद दत्ता, हरेंद्र कुमार, शुभम रॉय, शिल्पी कुमारी, अजय वर्मा, ब्रजेश आनन्द,प्रवीण ओहदार,चंद्रभूषण साहू, बालकृष्ण आदि भी उपस्थित रहें.
रिपोर्ट- रणधीर

















