झारखंड शराब घोटाले में एसीबी ने रामगढ़ डीसी व पूर्व उत्पाद आयुक्त फैज अक अहमद से पूछताछ की। 38.44 करोड़ के घोटाले में 13 पर केस दर्ज है।
Jharkhand Liquor Scam Case Update : झारखंड शराब घोटाले की जांच में एक बार फिर एसीबी की सक्रियता बढ़ती दिख रही है। सोमवार को उत्पाद विभाग के तत्कालीन आयुक्त और वर्तमान में रामगढ़ के उपायुक्त फैज अक अहमद से एसीबी अधिकारियों ने विस्तृत पूछताछ की। पूछताछ उत्पाद आयुक्त के तौर पर उनके कार्यकाल के उन फैसलों और रिपोर्टों को लेकर हुई, जिनसे विभाग में हुई अनियमितताएं उजागर हुई थीं।
Jharkhand Liquor Scam Case Update
सूत्रों के मुताबिक, फैज अक अहमद ने अपने कार्यकाल में शराब आपूर्ति और प्लेसमेंट एजेंसियों से जुड़े कई गड़बड़ियों की ओर वरीय अधिकारियों का ध्यान दिलाया था। इसी आधार पर एसीबी ने उनसे यह जानना चाहा कि उन्होंने किन अनियमितताओं को पकड़ा था, किस स्तर पर नियम तोड़े गए थे और यह गड़बड़ी किन लोगों के निर्देश पर हुई। साथ ही यह भी पूछा गया कि उन्होंने इन अनियमितताओं की जानकारी किस अधिकारी को मौखिक या लिखित रूप में दी थी।
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ACB ने झारखंड शराब घोटाले में रामगढ़ डीसी व पूर्व उत्पाद आयुक्त फैज अक अहमद से पूछताछ की।
पूछताछ में गड़बड़ी किस स्तर पर और किसके निर्देश पर हुई, इस पर सवाल पूछे गये।
सूत्रों के अनुसार, फैज अक अहमद ने पहले भी विभागीय अनियमितताओं की ओर वरीय अधिकारियों का ध्यान दिलाया था।
13 लोगों पर दर्ज है केस, पहली गिरफ्तारी सचिव विनय चौबे की हुई थी।
दो प्लेसमेंट एजेंसियों की फर्जी बैंक गारंटी से 38.44 करोड़ का घोटाला उजागर हुआ था।
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एसीबी की ओर से अभी इस पूछताछ पर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, यह संकेत जरूर मिला है कि मंगलवार को भी फैज अक अहमद से पूछताछ जारी रह सकती है। पूछताछ नोटिस मिलने के बाद वे एसीबी के समक्ष अपना पक्ष रखने पहुंचे। ज्ञात हो कि झारखंड में हुए लगभग 38.44 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में एसीबी ने उत्पाद विभाग के तत्कालीन सचिव विनय चौबे सहित कुल 13 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की है। इस मामले में पहली गिरफ्तारी विनय चौबे की हुई थी।
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घोटाले का सबसे बड़ा हिस्सा दो प्लेसमेंट एजेंसियों की फर्जी बैंक गारंटी से जुड़ा है। एसीबी की एफआईआर के अनुसार, जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी थी कि वे बैंक गारंटी की जांच करें, उन्होंने यह जांच नहीं की। नतीजा यह हुआ कि इन एजेंसियों को अनुचित भुगतान होते रहे और बड़े पैमाने पर सरकारी राजस्व का नुकसान हुआ।
इन एजेंसियों पर बकाया राशि भी काफी बड़ी है। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार,
मेसर्स विजन हॉस्पिटैलिटी सर्विसेज एंड कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड पर मार्च 2025 तक 12 करोड़ 98 लाख 18 हजार 405 रुपये की देनदारी है।
मेसर्स मार्शन इनोवेटिव सिक्यूरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर मार्च 2025 तक 25 करोड़ 46 लाख 66 हजार 313 रुपये की देनदारी दर्ज है।
इन एजेंसियों पर कार्रवाई नहीं होने और रिकवरी प्रक्रिया में देरी ने इस पूरे मामले को और उलझा दिया है। एसीबी की पूछताछ का फोकस अब इस बात पर है कि यह चूक कैसे हुई और किस स्तर पर निर्णय प्रभावित हुए।
इस हाई-प्रोफाइल केस में कई और अधिकारियों से पूछताछ की संभावना जताई जा रही है। मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए तथ्य सामने आने के आसार हैं, जिससे झारखंड शराब घोटाले का दायरा और बड़ा हो सकता है।
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