रांची शराब घोटाला मामले में ED Investigation तेज हुई। Liquor Scam Jharkhand में तत्कालीन उत्पाद आयुक्तों को समन भेजकर पूछताछ की तैयारी है।
Ranchi Liquor Scam Update रांची: रांची में शराब घोटाले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अब जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। पीएमएलए के तहत दर्ज Liquor Scam Jharkhand मामले में ईडी उन सभी अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी कर रही है, जो तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय चौबे के कार्यकाल के दौरान उत्पाद आयुक्त के पद पर रहे। ईडी इन अधिकारियों को एक-एक कर समन जारी कर रांची स्थित कार्यालय में पूछताछ करेगी।
Ranchi Liquor Scam Update:
विनय चौबे के कार्यकाल के दौरान उत्पाद आयुक्त रहे अधिकारियों में आईएएस अमित कुमार, आईएएस कमलेश्वर प्रसाद सिंह, आईएएस कर्ण सत्यार्थी और आईएएस फैज अक अहमद शामिल हैं। ईडी यह जानना चाहती है कि नई उत्पाद नीति लागू होने के बाद विभागीय स्तर पर क्या प्रक्रियाएं अपनाई गईं और घोटाले को समय रहते क्यों नहीं रोका गया।
Key Highlights
• Ranchi liquor scam की जांच में ED ने दायरा बढ़ाया
• Vinay Choubey के कार्यकाल के Excise Commissioners से पूछताछ की तैयारी
• PMLA के तहत ECIR 10/25 दर्ज, ED Investigation तेज
• Fake bank guarantee के जरिए manpower supply का ठेका लेने का मामला
• ED को घोटाला 200 करोड़ से अधिक का होने की आशंका
Ranchi Liquor Scam Update
ईडी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा 20 मई 2025 को दर्ज कांड संख्या 09/25 के आधार पर 28 नवंबर को पीएमएलए के तहत इंफोर्समेंट केस इंफार्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) 10/25 दर्ज की थी। इसके बाद से ही ED Investigation लगातार आगे बढ़ रही है और मनी ट्रेल की गहन जांच की जा रही है।
ईसीआईआर दर्ज होने के बाद ईडी ने प्लेसमेंट एजेंसी विजन हॉस्पिटेलिटी सर्विसेज एंड कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के तीन निदेशकों से बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में पूछताछ की है। इनमें परेश अभेसिंह ठाकोर, विक्रमासिंह अभेसिंह ठाकोर और महेश शिडगे शामिल हैं। तीनों को एसीबी ने 14 अक्टूबर को अहमदाबाद से गिरफ्तार किया था।
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जांच में सामने आया है कि संबंधित प्लेसमेंट एजेंसी ने फर्जी बैंक गारंटी देकर उत्पाद विभाग में मैनपावर सप्लाई का ठेका हासिल किया। ईडी अब यह जानने का प्रयास कर रही है कि किन अधिकारियों के सहयोग से यह ठेका मिला और विभागीय स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया कैसे प्रभावित हुई।
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ईडी यह भी जांच कर रही है कि शराब घोटाले की शुरुआत कब हुई और इसका खुलासा मई 2025 में ही क्यों हुआ, जबकि नई उत्पाद नीति 2022 में लागू हो चुकी थी। शुरुआती जांच में एसीबी को संकेत मिले हैं कि यह घोटाला 38 करोड़ रुपये से कहीं अधिक, संभवतः 200 करोड़ रुपये से भी ऊपर का हो सकता है।
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उत्पाद आयुक्तों के कार्यकाल की बात करें तो आईएएस अमित कुमार 4 अगस्त 2021 से 10 जुलाई 2022 तक इस पद पर रहे। आईएएस कमलेश्वर प्रसाद सिंह का कार्यकाल जुलाई से दिसंबर 2022 तक रहा। आईएएस कर्ण सत्यार्थी करीब चार महीने तक उत्पाद आयुक्त रहे, जबकि आईएएस फैज अक अहमद अगस्त 2023 से मार्च 2024 तक इस पद पर पदस्थापित थे।
अब ईडी इन सभी अधिकारियों से पूछताछ कर यह स्पष्ट करना चाहती है कि शराब घोटाले के दौरान विभागीय जिम्मेदारियों का निर्वहन कैसे हुआ और किन स्तरों पर अनियमितताएं हुईं।
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