बिहार में साइबर ठगी का नया नेटवर्क : एनजीओ और ट्रस्ट के करंट अकाउंट भी किराए पर, 15 ट्रस्ट जांच के घेरे में

बिहार में साइबर ठगी का नया नेटवर्क : एनजीओ और ट्रस्ट के करंट अकाउंट भी किराए पर, 15 ट्रस्ट जांच के घेरे में

पटना : बिहार में साइबर ठगी का जाल अब और ज्यादा संगठित व खतरनाक होता जा रहा है। साइबर शातिरों के नेटवर्क ने अब सिर्फ गरीबों के सेविंग अकाउंट ही नहीं, बल्कि एनजीओ और ट्रस्ट के करंट अकाउंट को भी ठगी के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की जांच में बिहार के करीब 15 ट्रस्ट और एनजीओ संदेह के दायरे में आए हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, हर महीने करीब 20 हजार म्यूल अकाउंट बिहार के विभिन्न बैंकों में खुल रहे हैं, जिनमें से 6 हजार खाते सीज भी किए जा रहे हैं। यह कार्रवाई इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के इनपुट पर की जा रही है।

हर दिन 200 म्यूल अकाउंट, EOU की विशेष टीम अलर्ट

जांच एजेंसियों के अनुसार, बिहार में हर दिन औसतन 200 म्यूल अकाउंट खुल रहे हैं। EOU की विशेष टीम लगातार इन खातों पर नजर रख रही है और समय-समय पर बैंकों के साथ समन्वय कर कार्रवाई कर रही है। हजार से अधिक म्यूल अकाउंट की पहचान कर उन्हें सीज कराया जा चुका है।

क्या है म्यूल अकाउंट?

म्यूल अकाउंट वह खाता होता है जो किसी और के नाम पर खुला होता है, लेकिन उसका संचालन साइबर ठग या कोई तीसरा व्यक्ति करता है। साइबर ठगी के दौरान पीड़ित के खाते से निकली रकम जिन खातों में जाती है, पुलिस उन्हें म्यूल अकाउंट मानती है।जांच में सामने आया है कि अधिकांश म्यूल अकाउंट निजी बैंकों में हैं, जिनमें प्रमुख रूप से—ICICI बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक, बंधन बैंक और यस बैंक हैं।

एनजीओ और ट्रस्ट के करंट अकाउंट किराए पर

EOU की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि अब साइबर शातिर करंट अकाउंट का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं। करंट अकाउंट में एक बार में बड़ी रकम ट्रांसफर और निकासी आसान होती है, इसलिए ठग इसे ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। जांच में पाया गया कि बिहार और यूपी के कई एनजीओ व ट्रस्ट अपने करंट अकाउंट किराए पर दे रहे हैं। इसी सिलसिले में बिहार के 15 ट्रस्ट जांच के दायरे में हैं।

दुकानदारों और गरीबों को बनाया जा रहा मोहरा

दुकानदारों को व्यवसाय में आर्थिक मदद का लालच देकर उनके नाम से करंट अकाउंट खुलवाते हैं। गरीबों के नाम पर खाता खुलवाकर एटीएम, सिम और मोबाइल अपने पास रख लेते हैं। बदले में उन्हें हर महीने 5–6 हजार रुपये दिए जाते हैं।
फर्जी दस्तावेजों से भी खुल रहे खाते

जांच में यह भी सामने आया है कि बड़ी संख्या में खाते फर्जी दस्तावेजों से खोले जा रहे हैं। साइबर शातिरों के पास सैकड़ों म्यूल अकाउंट होते हैं, जिनमें ठगी की रकम को एक साथ कई खातों में ट्रांसफर किया जाता है।
क्रिप्टो के जरिए विदेश भेजी जा रही रकम अधिकांश फाइनेंशियल फ्रॉड मामलों में ठगी की रकम पहले म्यूल अकाउंट में जाती है, फिर उसे क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेशों में निवेश कर दिया जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार “सख्त कार्रवाई से साइबर शातिरों की कमर तोड़ी जा सकती है। म्यूल अकाउंट रोकने का सबसे प्रभावी तरीका कम्यूनिटी पुलिसिंग है। आम लोगों को जागरूक किए बिना इस नेटवर्क को खत्म करना मुश्किल है।”

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