केंद्रीय गृह मंत्री के निर्देश पर एनसीबी मादक पदार्थ तस्करी में पुलिस की भूमिका की जांच करेगी। दागी अफसरों की सूची गृह सचिव को सौंपी जाएगी।
Drug Trafficking Investigation रांची: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी में पुलिस की संभावित भूमिका की जांच शुरू की जा रही है। इस जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय एजेंसी Narcotics Control Bureau को सौंपी गई है। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट गृह सचिव को दी जाएगी, जिसके आधार पर दागी अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह राज्य में पहली बार है जब मादक पदार्थों की तस्करी में पुलिस की भूमिका की औपचारिक जांच शुरू हो रही है।
Drug Trafficking Investigation: एनसीबी ने तय किए जांच के पैरामीटर
एनसीबी ने जांच के लिए स्पष्ट पैरामीटर तैयार किए हैं। इनमें गिरफ्तार आरोपी का नाम, आरोपी किस संगठन से जुड़ा है, बरामद मादक पदार्थ का प्रकार और मात्रा, संबंधित पुलिस अधिकारी या कर्मी की भूमिका तथा जांच के बाद विभाग द्वारा की गई कार्रवाई का अध्ययन शामिल है। इन्हीं बिंदुओं पर तथ्य जुटाकर पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों को चिह्नित किया जाएगा और सूची तैयार कर गृह सचिव को सौंपी जाएगी।
Key Highlights
एनसीबी को मादक पदार्थ तस्करी में पुलिस की भूमिका जांचने का निर्देश
दागी अफसरों और कर्मियों की सूची गृह सचिव को सौंपी जाएगी
जांच के लिए स्पष्ट पैरामीटर तय किए गए
18 नवंबर की समीक्षा बैठक के बाद शुरू हुई प्रक्रिया
चार वर्षों में आठ जिलों में अफीम की खेती 27 हजार एकड़ से अधिक
Drug Trafficking Investigation: समीक्षा बैठक के बाद मिला था जांच का दायित्व
केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में 18 नवंबर को हुई समीक्षा बैठक में एनसीबी को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि वह ऐसे पुलिस कर्मियों या अन्य एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों की सूची तैयार करे, जो मादक पदार्थों की तस्करी में संलिप्त पाए जाते हैं। निर्देश था कि पहचान के बाद सूची गृह सचिव को दी जाए, ताकि दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
Drug Trafficking Investigation: चार वर्षों में अफीम की खेती में तेज बढ़ोतरी
पुलिस आंकड़ों के अनुसार झारखंड में अफीम की खेती का ग्राफ पिछले चार वर्षों में लगातार बढ़ा है। चतरा, खूंटी, लातेहार, रांची, पलामू, चाईबासा, सरायकेला और हजारीबाग जिले फिलहाल सबसे अधिक चर्चित हैं। वर्ष 2021 22 में जहां इन जिलों में 2871 एकड़ क्षेत्र में अफीम की खेती चिह्नित कर नष्ट की गई थी, वहीं 2024 25 में यह रकबा बढ़कर 27 हजार से अधिक एकड़ तक पहुंच गया। यह बढ़ोतरी रोकथाम प्रयासों की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
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