रांची से दक्षिण भारत जाने वाली ट्रेनों में भारी भीड़, मजदूर परिवारों के साथ फर्श और दरवाजों पर खड़े होकर 45 घंटे का सफर, झारखंड में रोजगार पर सवाल।
Migration Crisis रांची: मंगलवार को रांची से दक्षिण भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों में झारखंड से हो रहे पलायन की भयावह तस्वीरें सामने आईं। रोजगार, शिक्षा और बेहतर भविष्य की तलाश में लोग 45 घंटे का जोखिम भरा सफर करने को मजबूर दिखे। हटिया-एसएमवीटी बेंगलुरु सुपरफास्ट एक्सप्रेस की जनरल बोगियां यात्रियों से पूरी तरह ठसाठस भरी रहीं। फर्श, शौचालय और दरवाजों के पास खड़े होकर सफर करते मजदूरों की भीड़ झारखंड की जमीनी सच्चाई को उजागर कर रही है।
ट्रेन में सवार कई मजदूर सपरिवार सफर कर रहे हैं। महिलाओं और बच्चों के साथ खचाखच भरी बोगियों में यात्रा करना उनकी मजबूरी बन चुकी है। हटिया स्टेशन पर उमड़ी भीड़ यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर अपने ही राज्य में लोगों को काम और सम्मानजनक जीवन क्यों नहीं मिल पा रहा।
Migration Crisis: खेती ठप, मजदूरी ही आखिरी सहारा
गुमला जिले के प्रमोद ने बताया कि वह मजदूरी करने बेंगलुरु जा रहे हैं। इस बार झारखंड में खेती अच्छी नहीं हुई, जिससे घर चलाने का कोई साधन नहीं बचा। ट्रेन में सीट तो दूर, पैर रखने तक की जगह नहीं है। दरवाजे पर एक पैर टिकाकर खड़ा रहना मजबूरी है। उन्होंने कहा कि अगर गांव या जिले में रोजगार होता तो सैकड़ों मील दूर जाने की नौबत ही नहीं आती।
Key Highlights
रांची से दक्षिण भारत जाने वाली ट्रेनों में भारी भीड़
मजदूर परिवारों के साथ फर्श और दरवाजों पर खड़े होकर सफर
खेती प्रभावित होने से मजदूरी के लिए बढ़ा पलायन
हटिया स्टेशन पर उमड़ी भीड़ ने खड़े किए गंभीर सवाल
ट्रेनों के फेरे बढ़ाने की मांग को लेकर डीआरएम को पत्र
Migration Crisis: बेंगलुरु और चेन्नई ही मजबूरी
रोहतास के अरविंद पासवान, जो मिस्त्री का काम करते हैं, भी मजदूरी के लिए बेंगलुरु जा रहे हैं। उनका कहना है कि हटिया से दक्षिण भारत जाने वाली सीधी ट्रेन ही एकमात्र विकल्प है, लेकिन उसमें भी बैठने की जगह नहीं मिलती। अधिकतर यात्रियों को खड़े होकर या फर्श पर बैठकर सफर करना पड़ रहा है। मजदूरों का कहना है कि बेंगलुरु और चेन्नई अब रोजगार की मजबूरी बन चुके हैं।
Migration Crisis: ट्रेनों के फेरे बढ़ाने की मांग तेज
झारखंड पैसेंजर्स एसोसिएशन के प्रदेश सचिव प्रेम कटारूका ने कहा कि राज्य के विभिन्न जिलों से हजारों यात्री दक्षिण भारत जाते हैं। इनमें मजदूर, छात्र, नौकरीपेशा लोग और मरीज शामिल होते हैं। जनवरी में खेती-बाड़ी का काम रुकते ही पलायन बढ़ जाता है, जिससे ट्रेनों पर दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है। एसोसिएशन ने डीआरएम को पत्र लिखकर दक्षिण भारत जाने वाली ट्रेनों के फेरे बढ़ाने की मांग की है।
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