Chaibasa: झारखंड पुलिस ने नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता मिली है। केंद्रीय सशस्त्र बलों के सहयोग से पुलिस ने सारंडा के घने जंगलों में नक्सलियों की कमर तोड़ते हुए भाकपा (माओवादी) के केंद्रीय कमेटी सदस्य और एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली अनल दा उर्फ पतिराम मांझी को मार गिराया है। इस भीषण एनकाउंटर में अनल दा के साथ अन्य 14 नक्सलियों के मारे जाने की सूचना है, जिनमें कई इनामी नक्सली शामिल बताए जा रहे हैं। आईजी अभियान माइकल राज ने अनल दा के मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि की है।
सुबह 6 बजे शुरू हुआ एनकाउंटर, सर्च ऑपरेशन जारीः
झारखंड पुलिस मुख्यालय के अनुसार, 22 जनवरी 2026 को सुबह करीब 6 बजे चाईबासा जिले में माओवादी दस्ते और सशस्त्र सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ शुरू हुई। मुठभेड़ के बाद चलाए गए सर्च अभियान में 15 नक्सलियों के शव, भारी मात्रा में हथियार और दैनिक उपयोग का सामान बरामद किया गया है। मृत नक्सलियों में एक की पहचान भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता अनल दा उर्फ पतिराम मांझी (CCM) के रूप में की गई है, जिस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।
कुंभडीह गांव के पास घेराबंदी,कोबरा-जगुआर-CRPF की संयुक्त कार्रवाईः
यह बड़ी कार्रवाई पश्चिमी सिंहभूम जिले के छोटानागरा थाना क्षेत्र अंतर्गत कुंभडीह गांव के पास हुई। सुरक्षा बलों को सटीक खुफिया सूचना मिली थी कि अनल दा का दस्ता किसी बड़ी नक्सली वारदात की साजिश रच रहा है। इसके बाद कोबरा, जगुआर और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने इलाके की घेराबंदी की। सुबह से शुरू हुई मुठभेड़ में दोनों ओर से जबरदस्त गोलीबारी हुई। एनकाउंटर के बाद चलाए गए सर्च ऑपरेशन में AK-47, इंसास राइफल, SLR और सैकड़ों कारतूस बरामद किए गए हैं। ग्रामीणों की मदद से शवों की पहचान की जा रही है।
कौन था अनल दा उर्फ पतिराम मांझीः
अनल दा झारखंड के गिरिडीह जिले का निवासी था और वर्षों से सारंडा के घने जंगलों में सक्रिय था। वह भाकपा (माओवादी) की झारखंड-बिहार स्पेशल एरिया कमेटी से जुड़ा था और संगठन की कमान संभाल रहा था। उसके मारे जाने के बाद अब झारखंड में केवल दो एक करोड़ के इनामी नक्सली शेष बचे हैं। जानकारी के अनुसार अनल दा जैसे शीर्ष नेता का खात्मा माओवादी संगठन के लिए करारा झटका है और इससे नक्सल नेटवर्क बुरी तरह कमजोर होगा।
2025: नक्सल विरोधी अभियान का रिकॉर्ड वर्ष
साल 2025 झारखंड पुलिस के लिए नक्सल मोर्चे पर ऐतिहासिक रहा। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक—
- 32 नक्सली एनकाउंटर में मारे गए
- 30 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया
- 279 नक्सली गिरफ्तार किए गए
2001 से 2010 तक झारखंड में एनकाउंटर में नक्सलियों के मारे जाने का आंकड़ा लगभग शून्य था। लेकिन 2011 से 2025 तक कुल 235 नक्सली मारे जा चुके हैं, जिनमें कई एक करोड़ और लाखों के इनामी शामिल हैं।
नक्सलवाद का दायरा सिमटा, अंत की ओर बढ़ता लाल आतंकः
लगातार सफल अभियानों के चलते झारखंड में नक्सलवाद अब सारंडा और कोल्हान जैसे सीमित इलाकों तक सिमट गया है। 2026 की शुरुआत में अनल दा जैसे बड़े नेता का मारा जाना इस बात का संकेत है कि सुरक्षा बल निर्णायक बढ़त बना चुके हैं। राज्य और केंद्र सरकार का लक्ष्य 2026 के अंत तक झारखंड से नक्सलवाद का पूर्ण सफाया करना है। विकास योजनाओं, सरेंडर पॉलिसी और सामुदायिक सहयोग से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
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