अब सुप्रीम कोर्ट-हाइकोर्ट के जज, IAS-IPS, CA और CS भी PhD कर सकेंगे, एकेडमिक काउंसिल ने लिया अहम फैसला

Ranchi: उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में एक अहम फैसला लेते हुए छोटानागपुर लॉ कॉलेज (ऑटोनोमस), रांची ने पीएचडी (लॉ) को लेकर नई व्यवस्था लागू की है। अब सुप्रीम कोर्ट और हाइकोर्ट के सक्रिय जजों के साथ-साथ IAS, IPS, चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और कंपनी सेक्रेटरी (CS) भी यहां से पीएचडी कर सकेंगे। इन सभी को कोर्स वर्क की कक्षाओं से छूट दी जाएगी, हालांकि प्रेजेंटेशन, इंटरव्यू और अन्य निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।

एकेडमिक काउंसिल की बैठक में लिया गया निर्णयः

यह निर्णय रविवार को आयोजित कॉलेज की एकेडमिक काउंसिल की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. पंकज कुमार चतुर्वेदी ने की। काउंसिल में पीएचडी (लॉ) पाठ्यक्रम 2026 को भी औपचारिक रूप से स्वीकृति प्रदान की गई।

एलएलबी-एलएलएम पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा शामिलः

काउंसिल ने यह भी तय किया कि अब एलएलबी और एलएलएम के सभी विषयों में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े प्रावधानों को शामिल किया जाएगा। इसमें विधिशास्त्र, विधिक इतिहास, अंतरराष्ट्रीय विधि, पारिवारिक विधि, बैंकिंग लॉ, आर्बिट्रेशन और मीडिएशन जैसे विषयों को विशेष रूप से जोड़ा जाएगा।

पीएचडी प्रक्रिया होगी अधिक पारदर्शीः

पीएचडी प्रक्रिया को पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए थिसिस और उसके सारांश का ऑनलाइन मूल्यांकन किया जाएगा। इसके लिए दो बाह्य परीक्षक नियुक्त होंगे, जिनमें एक परीक्षक विदेश से होगा। साथ ही पीएचडी इंटरव्यू की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कर उसे कॉलेज के आधिकारिक यूट्यूब चैनल या वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।

लेजिस्लेटिव ड्राफ्टिंग कोर्स भी जोड़ा गयाः

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के निर्देशों के तहत एलएलबी और एलएलएम पाठ्यक्रम में लेजिस्लेटिव ड्राफ्टिंग को शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत छात्रों को कानून और विधेयक तैयार करने, शब्दावली के चयन और मसौदा निर्माण की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी।

रिसर्च एडवाइजरी कमेटी करेगी प्रगति की समीक्षाः

कॉलेज में रिसर्च एडवाइजरी कमेटी का गठन किया जाएगा, जो प्रत्येक एक से तीन महीने में रिसर्च स्कॉलर्स की प्रगति की समीक्षा करेगी। इससे शोध कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित की जाएगी।

मल्टी-लेयर फिल्टर सिस्टम से होगा रिसर्च प्रस्ताव का चयनः

रिसर्च प्रस्ताव के लिए मल्टी-लेयर फिल्टर सिस्टम लागू किया जाएगा। इसके तहत प्रस्ताव को तीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के पास भेजा जाएगा। उनकी स्वीकृति के बाद ही पीएचडी में रजिस्ट्रेशन संभव होगा।

यूजीसी और रांची विश्वविद्यालय की गाइडलाइंस के तहत प्रक्रियाः

पीएचडी में नामांकन और उपाधि प्रदान करने की पूरी प्रक्रिया लोकभवन, यूजीसी और रांची विश्वविद्यालय की गाइडलाइंस के अनुरूप होगी। कॉलेज का यह निर्णय उच्च शिक्षा में शोध को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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