Jharkhand High Court’s Strictness: Illegal Detention में 19 वर्षीय मैट्रिक छात्र की परीक्षा छूटी, पुलिस को कड़ी फटकार

झारखंड हाईकोर्ट ने चतरा में 19 वर्षीय मैट्रिक परीक्षार्थी को अवैध हिरासत में रखने पर पुलिस को फटकार लगाई। हेबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई के बाद छात्र को छोड़ा गया।


Jharkhand High Court’s strictness :  चतरा जिले के लावालौंग और टंडवा थाना क्षेत्र में 19 वर्षीय मैट्रिक परीक्षार्थी को कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखने के मामले को झारखंड हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। अदालत ने पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कई अहम सवाल खड़े किए हैं।

हेबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जाहिर की। इस दौरान यह भी सामने आया कि हिरासत में रखे जाने के कारण छात्र की मैट्रिक परीक्षा छूट गई।

Jharkhand High Court’s strictness : हेबियस कॉर्पस याचिका पर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी

मामले की सुनवाई झारखंड उच्च न्यायालय में जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने की।

पहली ही सुनवाई में अदालत ने चतरा डीएसपी तथा लावालौंग और टंडवा थाना प्रभारी की उपस्थिति पर सवाल उठाया। अदालत ने पूछा कि जब उपस्थित होने का निर्देश नहीं था तो वे क्यों आए और यदि आए तो केस डायरी साथ क्यों नहीं लाए।

खंडपीठ ने पुलिस अधिकारियों से सीधे सवाल किया कि 26 और 27 जनवरी की रात दो बजे छात्र को घर से क्यों उठाया गया। पूछताछ के बाद उसे तुरंत क्यों नहीं छोड़ा गया और दस दिनों तक हिरासत में क्यों रखा गया।

  • 19 वर्षीय मैट्रिक परीक्षार्थी को कथित अवैध हिरासत में रखा गया

  • हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों से कड़े सवाल पूछे

  • 26 जनवरी की रात दो बजे घर से उठाया गया छात्र

  • 24 घंटे में मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया

  • हेबियस कॉर्पस याचिका के बाद छात्र को घर भेजा गया


Jharkhand High Court’s strictness : रात दो बजे घर से उठाया, 10 दिन तक हिरासत

याचिका में बताया गया है कि रंगदारी के एक मामले में छात्र के मोबाइल को संदिग्ध मानते हुए लावालौंग थाना पुलिस ने 26 जनवरी की रात करीब दो बजे उसे घर से उठा लिया। उस समय वह मैट्रिक परीक्षा की तैयारी कर रहा था।

पूछताछ के बाद भी उसे रिहा नहीं किया गया और टंडवा थाना को सौंप दिया गया। आरोप है कि उसे करीब दस दिनों तक अवैध रूप से हिरासत में रखा गया।

कानूनी प्रावधान के अनुसार किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेने के बाद 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।

Jharkhand High Court’s strictness : याचिका दायर होते ही छात्र को घर पहुंचाया

जब परिजनों ने हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर की, तब छात्र को घर पहुंचा दिया गया। हालांकि याचिकाकर्ता का आरोप है कि पुलिसकर्मी उसके घर के आसपास तैनात हैं और केस वापस लेने का दबाव बना रहे हैं।

याचिका में यह भी कहा गया है कि अवैध हिरासत के कारण छात्र की मैट्रिक परीक्षा प्रभावित हुई है, जिससे उसके भविष्य पर असर पड़ा है।

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब इस मामले में पुलिस की जवाबदेही और कानूनी प्रक्रिया के पालन को लेकर व्यापक बहस शुरू हो गई है।

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