झारखंड में राजस्व संग्रह एजेंसियों का करार खत्म होने के बाद प्रॉपर्टी टैक्स, वाटर यूजर चार्ज और ट्रेड लाइसेंस फीस की वसूली प्रभावित हुई है।
Jharkhand Property Tax रांची: झारखंड के नगर निकायों में प्रॉपर्टी टैक्स, वाटर यूजर चार्ज और ट्रेड लाइसेंस फीस की वसूली व्यवस्था अचानक प्रभावित हो गई है। इसकी वजह सिर्फ निजी एजेंसियों का करार खत्म होना नहीं है, बल्कि उनके हटने के बाद कलेक्शन की जिम्मेदारी संभालने के लिए नगर निकायों की पर्याप्त तैयारी नहीं होना भी है।
राज्य शहरी विकास अभिकरण यानी सूडा ने तीन राजस्व संग्रह एजेंसियों श्री पब्लिकेशन एंड स्टेशनर्स, रितिका और स्पैरो का करार समाप्त कर दिया है। नयी एजेंसी का चयन अभी नहीं हुआ है। ऐसे में अब नगर निकायों को अपने स्तर से टैक्स वसूली करनी है, लेकिन कई निकायों के पास इसके लिए पर्याप्त टैक्स कलेक्टर और फील्ड नेटवर्क उपलब्ध नहीं है।
Jharkhand Property Tax: एजेंसियों के हटने से नगर निकायों की आय पर असर
नगर निकायों की अपनी आय में प्रॉपर्टी टैक्स, जल शुल्क और ट्रेड लाइसेंस फीस का बड़ा योगदान होता है। कलेक्शन व्यवस्था में व्यवधान का सीधा असर निकायों के राजस्व पर पड़ सकता है।
रांची जैसे बड़े नगर निकाय में टैक्स वसूली का लक्ष्य काफी बड़ा है। ऐसे में यदि कुछ सप्ताह तक व्यवस्था प्रभावित रहती है तो बकाया वसूली के साथ चालू वित्तीय वर्ष के राजस्व लक्ष्य पर भी असर पड़ने की आशंका है।
सूडा के आदेश के बाद मंगलवार से श्री पब्लिकेशन एंड स्टेशनर्स, रितिका और स्पैरो के माध्यम से चल रही राजस्व संग्रह व्यवस्था समाप्त हो गई। इन एजेंसियों का मूल करार पहले ही समाप्त हो चुका था और नयी एजेंसी के चयन तक अवधि विस्तार देकर काम लिया जा रहा था। अब यह विस्तार भी समाप्त कर दिया गया है।
Key Highlights
सूडा ने तीन राजस्व संग्रह एजेंसियों का करार समाप्त किया
प्रॉपर्टी टैक्स, वाटर यूजर चार्ज और ट्रेड लाइसेंस फीस की वसूली प्रभावित
नयी एजेंसी का चयन अभी नहीं हुआ है
कई नगर निकायों के पास पर्याप्त टैक्स कलेक्टर और फील्ड नेटवर्क नहीं
कलेक्शन में देरी से नगर निकायों के राजस्व लक्ष्य पर पड़ सकता है असर
Jharkhand Property Tax: निकायों के पास न कर्मचारी, न पर्याप्त फील्ड नेटवर्क
निजी एजेंसियों के हटने के बाद नगर निकायों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त मानव संसाधन की है। कई निकायों में पहले से ही टैक्स कलेक्टरों की कमी है। अब उन्हें अपने स्तर से संपत्तियों, मकानों और दुकानों से टैक्स वसूली करनी होगी।
धनबाद नगर निगम इसका उदाहरण है, जहां पर्याप्त टैक्स कलेक्टर उपलब्ध नहीं हैं। निजी एजेंसियों के कर्मचारी वर्षों से अपने-अपने क्षेत्रों में संपत्तियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जानकारी के आधार पर कलेक्शन कर रहे थे। उनके हटने के बाद तत्काल वैकल्पिक टीम तैयार करना नगर निकायों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
नयी एजेंसी के चयन से पहले पुरानी व्यवस्था समाप्त किए जाने से रांची समेत राज्य के सभी नगर निकायों में राजस्व संग्रह प्रभावित होने की स्थिति बनी है।


















