असम में 35-40 सीटों पर आदिवासी वोट निर्णायक। हेमंत सोरेन की तिनसुकिया रैली के बाद JMM की एंट्री के संकेत, भाजपा ने संगठन पर उठाए सवाल।
Assam Election 2026 रांची: असम विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में नई हलचल देखी जा रही है। हेमंत सोरेन की हालिया असम यात्रा और तिनसुकिया में आदिवासी महासभा को संबोधन के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा राज्य की 35 से 40 विधानसभा सीटों पर गंभीरता से आकलन कर रहा है।
इन सीटों पर आदिवासी और चाय बागान मजदूरों की निर्णायक भूमिका मानी जाती है। असम में आदिवासी आबादी लगभग 70 लाख बताई जाती है, जो कुल आबादी का करीब 20 प्रतिशत है। हालांकि 2011 की जनगणना के अनुसार 38.8 लाख लोगों को ही अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिला है।
असम की 35-40 सीटों पर JMM कर रहा है आकलन
तिनसुकिया रैली में 30 हजार लोगों की मौजूदगी
आदिवासी वोट बैंक चुनाव में निर्णायक
भाजपा ने JMM की संगठनात्मक ताकत पर उठाए सवाल
कांग्रेस भी कोकराझार में बैठक कर सक्रिय
Assam Election 2026:तिनसुकिया रैली से मिला राजनीतिक संकेत
एक फरवरी को तिनसुकिया जिले में आयोजित आदिवासी महासभा में करीब 30 हजार लोगों की मौजूदगी रही। इस कार्यक्रम में हेमंत सोरेन ने आदिवासियों से एकजुट होकर मतदान करने की अपील की और कहा कि यदि समुदाय संगठित हो जाए तो वह असम की राजनीति की दिशा बदल सकता है।
सूत्रों के अनुसार, इसी मंच से असम में पार्टी की संभावित एंट्री के संकेत दिए गए। हालांकि असम में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने झामुमो की मौजूदगी को यह कहकर कमतर आंका है कि वहां उसकी मजबूत संगठनात्मक पकड़ नहीं है।
Assam Election 2026:उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने किया था दौरा
मुख्यमंत्री के दौरे से पहले जनवरी मध्य में झामुमो का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल असम गया था। टीम में जनजातीय कल्याण मंत्री चमरा लिंडा, सांसद विजय हांसदा और विधायक एमटी राजा व भूषण तिर्की शामिल थे। इस दौरान विभिन्न दलों से जुड़े आदिवासी नेताओं के साथ बंद कमरे में बैठकें भी हुईं।
पार्टी महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि यह दौरा जमीनी आकलन के लिए था और चुनाव लड़ने का अंतिम फैसला पार्टी अध्यक्ष ही करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि असम के आदिवासी हेमंत सोरेन का साथ चाहते हैं।
Assam Election 2026:कांग्रेस भी सक्रिय, कोकराझार में बैठक
इधर कांग्रेस भी असम चुनाव को लेकर सक्रिय है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और चुनाव पर्यवेक्षक कोकराझार पहुंचे और स्थानीय नेताओं के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव सांप्रदायिकता के खिलाफ निर्णायक लड़ाई होगा और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना होगा।
असम में आदिवासी और टी ट्राइब समुदाय की राजनीतिक भूमिका को देखते हुए आने वाला चुनाव कई मायनों में अहम माना जा रहा है। यदि झामुमो चुनावी मैदान में उतरता है तो राज्य की राजनीतिक समीकरणों में नया मोड़ आ सकता है।
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