रांची समेत झारखंड में रसोई गैस संकट गहराया। बुकिंग नहीं हो रही, DAC कोड नहीं आ रहा, एजेंसियों पर लंबी कतारें। होटल और फास्ट फूड कारोबार भी प्रभावित।
Jharkhand Gas Crisis रांची: राजधानी रांची समेत झारखंड के कई हिस्सों में इन दिनों रसोई गैस की किल्लत की आशंका से उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है। गैस बुकिंग से लेकर सिलिंडर प्राप्त करने तक लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शहर की अधिकांश गैस एजेंसियों में उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग रही हैं और लोग घंटों इंतजार के बाद भी गैस सिलिंडर पाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
कई उपभोक्ताओं का कहना है कि किसी भी माध्यम से गैस की बुकिंग नहीं हो पा रही है। यदि किसी तरह बुकिंग हो भी जाती है, तो डिलिवरी ऑथेन्टिकेशन कोड यानी डीएसी नहीं मिल रहा है। बुकिंग कराने के तीन से पांच दिन बाद भी कोड नहीं आने से गैस वितरण प्रक्रिया बाधित हो रही है।
Key Highlights
रांची समेत झारखंड में रसोई गैस की किल्लत से उपभोक्ता परेशान
बुकिंग और डिलिवरी के लिए DAC कोड नहीं आने से गैस वितरण प्रभावित
एजेंसियों और गोदामों के बाहर सुबह से दोपहर तक लंबी कतारें
कॉमर्शियल सिलिंडर की कमी से होटल और फास्ट फूड कारोबार प्रभावित
गैस संकट के बीच इंडक्शन कुकर और कोयले की मांग में तेज बढ़ोतरी
Jharkhand Gas Crisis: सर्वर डाउन होने से बुकिंग और अन्य सेवाएं प्रभावित
गैस एजेंसियों के अनुसार पिछले तीन दिनों से सर्वर सही तरीके से काम नहीं कर रहा है। इसके कारण उपभोक्ताओं की बुकिंग जनरेट नहीं हो पा रही है और कई जरूरी सेवाएं भी प्रभावित हो गई हैं। नया कनेक्शन, ट्रांसफर और अन्य प्रक्रियाएं भी फिलहाल ठप पड़ी हैं। एजेंसियों में लोगों को सलाह दी जा रही है कि सर्वर ठीक होने के बाद ही वे दोबारा आएं।
हालांकि जिन उपभोक्ताओं को डीएसी नंबर मिल जा रहा है, उन्हें भी समय पर सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। कई बार एजेंसियों से संपर्क करने के बाद भी संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है। कुछ एजेंसियों की ओर से लोगों से कहा जा रहा है कि घर चले जाएं, सिलिंडर बाद में पहुंचा दिया जाएगा।
Jharkhand Gas Crisis: एजेंसियों और गोदामों के बाहर लंबी कतारें
रांची की कई गैस एजेंसियों और उनके गोदामों में सुबह से दोपहर तक भारी भीड़ देखी जा रही है। लोग बाइक, स्कूटी, कार और ऑटो में सिलिंडर लेकर एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं। कई उपभोक्ता अपने जरूरी काम और ऑफिस छोड़कर गैस लेने पहुंचे, लेकिन घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा।
कोकर स्थित अदिति इंडेन एजेंसी में बुजुर्ग महिला शिखा दत्ता ने बताया कि उनके पड़ोसी को एक मार्च को गैस मिल गया था, लेकिन उन्हें अभी तक सिलिंडर नहीं मिल सका है। कई उपभोक्ताओं ने डीएसी कोड नहीं आने की शिकायत की। बरियातू स्थित केएसके गैस और बरियातू इंडेन एजेंसी में भी लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली, जहां कई ग्राहक बुकिंग और केवाईसी संबंधी समस्याओं से परेशान दिखे।
Jharkhand Gas Crisis: होटल और फास्ट फूड कारोबार भी प्रभावित
कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की कमी का असर होटल और फास्ट फूड कारोबार पर भी पड़ने लगा है। कई जगहों पर ऑनलाइन फूड डिलिवरी घटकर लगभग 20 प्रतिशत तक रह गई है। होटल प्रताप रेजीडेंसी के प्रोपराइटर त्रिलोचन सिंह ने बताया कि कॉमर्शियल सिलिंडर नहीं मिलने से होटल में ठहरे मेहमानों को भी पूरी तरह से भोजन सेवा देना मुश्किल हो गया है।
गैस की कमी के कारण कई फास्ट फूड के ठेले बंद होने लगे हैं और कुछ होटलों के किचन भी बंद होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। वहीं दूसरी ओर इंडक्शन कुकर की मांग में अचानक चार गुना तक बढ़ोतरी देखी जा रही है। बिजली कटौती के कारण कई घरों में इंडक्शन चूल्हा भी पूरी तरह राहत नहीं दे पा रहा है।
Jharkhand Gas Crisis: कोयले की कीमत में भी बढ़ोतरी
गैस नहीं मिलने के कारण लोग अब लकड़ी और कोयले का सहारा लेने लगे हैं। इसके चलते कोयले की मांग बढ़ गई है और कीमतों में भी तेजी आ गई है। पहले एक सीमेंट बोरी भर कोयले की कीमत 200 से 220 रुपये तक थी, जो अब बढ़कर 260 से 280 रुपये प्रति बोरी हो गई है।
इस बीच रसोई गैस की किल्लत को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष के विधायक शुक्रवार को विधानसभा में प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं। प्रदर्शन में झामुमो, कांग्रेस और राजद के विधायक शामिल होंगे।
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