Jharkhand Fuel Crisis Update: पेट्रोल पंपों की क्रेडिट सुविधा बंद, अब कैश में ही मिलेगा तेल

 झारखंड में तेल कंपनियों ने पेट्रोल पंपों की क्रेडिट सुविधा बंद की, संचालकों पर बढ़ा दबाव, सरकार पर 80 करोड़ बकाया।

Jharkhand Fuel Crisis Update रांची: झारखंड में पेट्रोल-डीजल आपूर्ति से जुड़ा एक बड़ा बदलाव सामने आया है। तेल कंपनियों ने राज्य के सभी पेट्रोल पंपों को दी जाने वाली क्रेडिट सुविधा पूरी तरह बंद कर दी है। अब पंप संचालकों को तेल खरीदने के लिए कैश भुगतान करना होगा, जिससे उनके वित्तीय प्रबंधन पर दबाव बढ़ गया है।

झारखंड पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के अनुसार, पहले कंपनियां पंपों को उनकी बिक्री के आधार पर 4 से 5 दिन का उधार देती थीं। यह क्रेडिट लिमिट करीब 12 लाख से 60 लाख रुपए तक होती थी, जिससे पंप संचालकों को संचालन में सहूलियत मिलती थी।


Key Highlights

  • झारखंड में पेट्रोल पंपों की क्रेडिट सुविधा पूरी तरह बंद

  • अब पंप संचालकों को कैश में खरीदना होगा तेल

  • उधार में पेट्रोल-डीजल देना मुश्किल

  • जरूरत से ज्यादा स्टॉक रखने पर भी रोक

  • सरकार पर 80 करोड़ रुपए का बकाया


कैश सिस्टम लागू, उधार तेल देना मुश्किल

क्रेडिट सुविधा बंद होने के बाद अब पंप संचालकों को नकद भुगतान कर तेल खरीदना होगा। एसोसिएशन के महासचिव प्रमोद कुमार के मुताबिक, इस फैसले से पंप मालिकों पर फंड मैनेजमेंट का दबाव काफी बढ़ गया है।

उन्होंने साफ कहा कि अब पंप संचालक ग्राहकों को उधार में पेट्रोल-डीजल देने की स्थिति में नहीं रहेंगे। हालांकि आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता सामान्य बनी रहने की बात कही गई है।

जरूरत से ज्यादा स्टॉक रखने पर भी रोक

नई व्यवस्था के तहत पंप संचालकों को जरूरत से ज्यादा तेल स्टॉक रखने की अनुमति भी नहीं दी जाएगी। इससे सप्लाई चेन को नियंत्रित करने और अनावश्यक भंडारण को रोकने की कोशिश की जा रही है।

सरकार पर 80 करोड़ का बकाया, भुगतान की मांग

एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार ने बताया कि झारखंड के विभिन्न सरकारी विभागों पर पेट्रोल पंपों का करीब 80 करोड़ रुपए बकाया है। इसमें अकेले रांची के पंपों का हिस्सा लगभग 12 करोड़ रुपए है।

उन्होंने कहा कि सरकारी विभाग अक्सर उधार में ईंधन लेते हैं, लेकिन भुगतान की कोई तय समय सीमा नहीं होती। इससे पंप संचालकों को नकद भुगतान कर तेल खरीदना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ रहा है।

एसोसिएशन ने सरकार से बकाया राशि के जल्द भुगतान की मांग की है और सरकारी विभागों के लिए साप्ताहिक भुगतान प्रणाली लागू करने का सुझाव दिया है। इस मुद्दे पर जल्द ही प्रतिनिधिमंडल राज्य के वित्त मंत्री से मुलाकात करेगा।

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