नालंदा : नालंदा विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए सबसे पहले महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गयाजी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंची। वहां पर बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन, केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर, केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री जीतन राम मांझी और बिहार सरकार के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने भव्य स्वागत किया। फिर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नालंदा के लिए रवाना हुईं।
राष्ट्रपति ने 36 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और 10 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी
आपको बता दें कि नालंदा विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छात्रों को सम्मानित किया। साथ ही 36 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और 10 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की। इस खास कार्यक्रम में गवर्नर सैयद अता हसनैन, विदेश मंत्री एस जयशंकर और बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार भी शामिल हुए।


नालंदा में ज्ञान को कभी भी अलग-थलग करके नहीं देखा गया – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बिहार के राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की शोभा बढ़ाई। राष्ट्रपति ने कहा कि नालंदा में ज्ञान को कभी भी अलग-थलग करके नहीं देखा गया। यह नैतिकता और समाज और मानवता के कल्याण से अविभाज्य रूप से जुड़ा हुआ था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे समय में, जब दुनिया कई जटिल चुनौतियों का सामना कर रही है, करुणा में निहित स्वतंत्र और आलोचनात्मक सोच की कहीं अधिक आवश्यकता है।


राष्ट्रपति ने कहा- नालंदा का पतन केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए एक बहुत बड़ी क्षति थी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि नालंदा का पतन केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए एक बहुत बड़ी क्षति थी। फिर भी, नालंदा की अवधारणा जीवंत रही। हमारे समय में इसका पुनरुत्थान उस गौरवशाली विरासत को आधुनिक परिवेश में पुनः स्थापित करने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने बिहार के नालंदा में एक मंदिर में हुई भगदड़ में अनेक श्रद्धालुओं की मृत्यु का समाचार अत्यंत दुखद है। मैं सभी शोकाकुल परिवारजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं। घायल हुए सभी लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की मैं कामना करती हूं।


आज का समारोह एक सभ्यतागत वादे की पुनःपुष्टि है – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
उन्होंने कहा कि आज का समारोह एक सभ्यतागत वादे की पुनःपुष्टि है। एक ऐसा वादा कि ज्ञान बना रहेगा, संवाद की जीत होगी और शिक्षा निरंतर मानवता की सेवा करती रहेगी। लगभग आठ शताब्दियों तक, प्राचीन नालंदा एशिया में बौद्ध विद्या का बौद्धिक केंद्र रहा। पूरे एशियाई महाद्वीप से विद्वान यहां अध्ययन करने, शास्त्रार्थ करने और धम्म के प्रति अपनी समझ को और गहरा करने के लिए आते थे। कहा जाता है कि प्राचीन नालंदा के पुस्तकालय में लाखों पांडुलिपियां मौजूद थीं। उस ऊंचे मानदंड को आधार बनाकर, आज हम यहां जो कुछ भी निर्मित कर रहे हैं, वह एक चिरस्थायी विरासत सिद्ध होगा।
600+ ग्रेजुएट्स। 31 देश। एक साझा सफर! – विदेश मंत्री एस जयशंकर
नालंदा विश्वविद्यालय के दूसरे दीशांत समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि 600+ ग्रेजुएट्स। 31 देश। एक साझा सफर। उन्होंने कहा कि आज राजगीर में नालंदा विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ शामिल होकर मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूं। नालंदा भारत की बौद्धिक विरासत और सांस्कृतिक भव्यता की यादें ताजा करता है और दुनिया को यह याद दिलाता है कि तकनीक और परंपरा- विकास भी, विरासत भी को साथ-साथ आगे बढ़ना चाहिए।


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