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JPSC Exam में भारी चूक: हिंदी प्रश्नपत्र में दर्जनों गलतियां, अभ्यर्थियों में नाराजगी

 जेपीएससी की सहायक वन संरक्षक मुख्य परीक्षा में हिंदी प्रश्नपत्र में गंभीर त्रुटियां सामने आईं, अभ्यर्थियों ने जताई नाराजगी।


JPSC Exam रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग में एक बार फिर गंभीर लापरवाही सामने आई है। सहायक वन संरक्षक के 78 पदों पर नियुक्ति के लिए आयोजित मुख्य लिखित परीक्षा के प्रश्नपत्र में हिंदी भाषा की कई बड़ी गलतियां पाई गई हैं। परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रश्नों को पढ़ते समय उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

छह अप्रैल 2026 को आयोजित इस परीक्षा की प्रथम पाली में जनरल स्टडीज प्रथम पत्र और द्वितीय पाली में जनरल स्टडीज द्वितीय पत्र लिया गया था। दोनों ही प्रश्नपत्रों में अंग्रेजी के साथ हिंदी में प्रश्न पूछे गए, लेकिन हिंदी अनुवाद और शब्दों में भारी त्रुटियां देखने को मिलीं।

JPSC Exam: प्रश्नपत्र में शब्दों और वाक्यों की गंभीर त्रुटियां

200 अंकों के इस प्रश्नपत्र में कई बुनियादी शब्दों की वर्तनी गलत लिखी गई थी। उदाहरण के तौर पर सिद्धू-कान्हू को सिडो-कान्हू, ऐतिहासिक को इतिहासिक, गठन को गढ़न और मुख्य को उखय लिखा गया। इसी तरह कारणों को कारणे और जन आंदोलन को आएंलनों लिखा गया।

इतना ही नहीं, मिशनरियों को मिशनीयों, गतिविधियों को गतिदिधियों, प्रश्न को प्रशन और शैक्षणिक को शांसिक लिखा गया। कई स्थानों पर पूरे वाक्य ही गलत ढंग से लिखे गए थे, जिससे प्रश्नों का आशय समझना कठिन हो गया।


Key Highlights:

  • जेपीएससी मुख्य परीक्षा के हिंदी प्रश्नपत्र में बड़ी संख्या में त्रुटियां

  • 78 पदों के लिए आयोजित हो रही है सहायक वन संरक्षक परीक्षा

  • अभ्यर्थियों को प्रश्न समझने में हुई परेशानी

  • कई शब्द और वाक्य गलत ढंग से लिखे गए

  • परीक्षा की निष्पक्षता और गुणवत्ता पर उठे सवाल


JPSC Exam:आदिवासी त्योहार से लेकर सामान्य शब्दों तक में गलती

प्रश्नपत्र में आदिवासी त्योहार को त्योदार, पुस्तक को पुस्तख, संक्षेप को संक्षेम और संरक्षण को संरक्षाण लिखा गया। इसके अलावा टिप्पणी की जगह रिप्पणी, समुदाय की जगह समुदाथ, विषय की जगह विएस और प्रमाणों की जगह प्रमाणें लिखा गया।

इसी तरह बुद्धिमत्ता को नुद्धिमता, वैश्विक को वैशिक, सिद्धांत को सिहधांत और समझाइए को समजाइए लिखा गया। दैनिक को दैनिस, कठोर को कढोर और घटनाओं को घरनाओं लिखा गया। सर्वोच्च न्यायालय को सर्वोच न्यायातक, संघीय को संछीय और मौलिक को मौविक लिखा गया।

JPSC Exam:परीक्षा की गुणवत्ता और निष्पक्षता पर उठे सवाल

अभ्यर्थियों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में त्रुटियां किसी भी प्रतिष्ठित परीक्षा के लिए चिंता का विषय हैं। इससे न केवल परीक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है, बल्कि उम्मीदवारों के प्रदर्शन पर भी असर पड़ता है।

चार अप्रैल से 12 अप्रैल तक चल रही इस परीक्षा को लेकर अब अभ्यर्थी आयोग से स्पष्टीकरण और उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरह की लापरवाही भविष्य में नहीं होनी चाहिए, इसके लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई जरूरी है।

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