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Digital Census 2026: झारखंड में 1 मई से Self Enumeration, पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना

झारखंड में 1 मई से डिजिटल जनगणना 2026 शुरू होगी। पहली बार सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा मिलेगी, 16 मई से घर-घर सर्वे शुरू होगा।


Digital Census 2026 रांची: देश में पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना की शुरुआत हो रही है और झारखंड में इसकी तैयारियां तेज कर दी गई हैं। गुरुवार से एन्यूमेरेटर यानी गणनाकर्मी और सुपरवाइजर यानी पर्यवेक्षकों का रजिस्ट्रेशन शुरू हो रहा है। राज्य में पहले चरण की प्रक्रिया 1 मई से 15 मई तक चलेगी, जिसमें लोगों को पहली बार स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने यानी सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा दी जाएगी।

इसके बाद 16 मई से 14 जून तक मकान सूचीकरण यानी हाउस लिस्टिंग का कार्य किया जाएगा। इस दौरान गणनाकर्मी घर-घर जाकर डेटा एकत्र करेंगे और दी गई जानकारी का सत्यापन करेंगे।

प्रभात कुमार के अनुसार, इस बार जनगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और सटीक बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।


Key Highlights:

• देश में पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी

• झारखंड में 1 से 15 मई तक Self Enumeration की सुविधा

• 16 मई से 14 जून तक हाउस लिस्टिंग और डोर-टू-डोर सर्वे

• गणनाकर्मी टैबलेट और मोबाइल से सीधे डेटा अपलोड करेंगे

• गलत जानकारी सुधारने और डेटा सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था


Digital Census 2026: क्या है इस बार का सबसे बड़ा बदलाव

इस बार जनगणना में सबसे बड़ा बदलाव सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा है। पहली बार लोगों को खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने का अवसर दिया जा रहा है। इससे प्रक्रिया तेज होगी और डेटा की शुद्धता भी बढ़ेगी।

लोग मोबाइल, टैबलेट या कंप्यूटर के माध्यम से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इससे सरकारी तंत्र पर बोझ कम होगा और नागरिकों की भागीदारी भी बढ़ेगी।

यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन जानकारी नहीं भर पाता है, तो उसे चिंता करने की जरूरत नहीं है। 16 मई से शुरू होने वाले डोर-टू-डोर सर्वे में गणनाकर्मी घर पहुंचकर पूरी जानकारी दर्ज करेंगे।

Digital Census 2026: कैसे होगा डेटा कलेक्शन

पहले चरण में मकानों की गणना और सूचीकरण किया जाएगा। यह काम पूरे राज्य में लगभग 30 दिनों तक चलेगा। गणनाकर्मी टैबलेट या मोबाइल के जरिए सीधे डेटा अपलोड करेंगे, जिससे कागजी प्रक्रिया काफी कम हो जाएगी।

सभी परिवारों के सदस्यों का विवरण दर्ज किया जाएगा। इसमें नाम, उम्र, परिवार की संरचना, आवास संबंधी जानकारी और अन्य जरूरी विवरण शामिल होंगे।

विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में अलग टीमों की तैनाती की गई है और जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, ताकि हर व्यक्ति तक सही जानकारी पहुंच सके।

Digital Census 2026: डेटा भरते समय किन बातों का रखें ध्यान

विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को परिवार के सभी सदस्यों की बुनियादी जानकारी पहले से तैयार रखनी चाहिए, ताकि डेटा भरने में आसानी हो।

नाम, उम्र और अन्य व्यक्तिगत विवरण सही और अपडेटेड होने चाहिए, क्योंकि छोटी गलती भी आगे सरकारी योजनाओं और दस्तावेजों में परेशानी का कारण बन सकती है।

डोर-टू-डोर सर्वे के दौरान जब गणनाकर्मी घर आएं, तो उनका पहचान पत्र जरूर जांचें। किसी के साथ ओटीपी साझा न करें और केवल सही जानकारी ही दें।

अगर कोई गलती हो जाए, तो सत्यापन के दौरान उसी समय सुधार कराया जा सकता है। बाद में भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत संशोधन का विकल्प उपलब्ध रहेगा।

Digital Census 2026: डेटा सुरक्षा को लेकर क्या व्यवस्था

पूरी जनगणना प्रक्रिया सुरक्षित डिजिटल सिस्टम पर आधारित होगी। अधिकारियों के अनुसार, एकत्रित डेटा को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा और इसका उपयोग केवल नीतिगत योजना और सरकारी विकास कार्यों के लिए किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि नागरिकों की निजी जानकारी की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और डेटा का किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा।

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