पटना बनेगा आधुनिक स्ट्रीट फूड संस्कृति का नया केंद्र, जानिए कैसे

पटना : पटना में बिहार के पारंपरिक व्यंजनों को नई पहचान दिलाने और स्ट्रीट फूड संस्कृति को व्यवस्थित एवं आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी उद्देश्य से पटना नगर निगम ने शहर में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त ‘स्ट्रीट फूड हब’ विकसित करने का प्रस्ताव शहरी विकास व आवास विभाग बिहार सरकार को भेजा है। यह निर्माण प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के अंतर्गत किया जाएगा। नगर निगम द्वारा यह पहल सार्वजनिक स्थलों पर फूड हाइजीन सुनिश्चित करने, स्ट्रीट वेंडर्स को स्वच्छ व सुरक्षित वेंडिंग स्थल उपलब्ध कराने व शहर में यातायात व्यवस्था को अधिक सुगम बनाने के उद्देश्य से की जा रही है। योजना के तहत शहर के अलग-अलग हिस्सों में ऑफ-स्ट्रीट फूड वेंडिंग जोन विकसित किए जायेगें। ताकि सड़क किनारे अनियमित ढंग से लगने वाली दुकानों को सुव्यवस्थित किया जा सके और लोगों को बेहतर खाद्य अनुभव मिल सकें।

तीन प्रमुख स्थलों का चयन

प्रस्तावित फूड हब के लिए तीन स्थलों जेपी गंगा पथ (दीघा गोलंबर), खटाल गली, कोतवाली एवं मीठापुर स्थित निर्माणाधीन कॉमन सर्विस सेंटर परिसर का चयन किया गया है। फूड हब में किसी प्रकार का स्थायी निर्माण नहीं किया जायेगा। बल्कि आधुनिक और व्यवस्थित अस्थायी संरचनाओं के माध्यम से वेंडिंग की सुविधा विकसित की जायेगी। यहां भोजन बनाने, बेचने और खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण की समुचित व्यवस्था होगी। इसके अतिरिक्त आम लोगों के बैठने के लिए आकर्षक व आरामदायक स्पेस विकसित किया जायेगा। परिसर में स्वच्छ शौचालय, पेयजल, बेहतर लाइटिंग, लैंडस्केपिंग, पार्किंग और साफ-सफाई की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जायेगी।

बिहार के पारंपरिक व्यंजनों को मिलेगा मंच

इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बिहार के पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा देना है। आमतौर पर बिहार के खानपान की चर्चा होते ही लिट्टी-चोखा, चंपारण मटन, मखाना, खाजा और ठेकुआ जैसे व्यंजनों का ही उल्लेख होता है, जबकि राज्य की पाक परंपरा इससे कहीं अधिक समृद्ध और विविधतापूर्ण है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार द्वारा योजना में यह प्रावधान किया गया है कि स्ट्रीट फूड हब की कम-से-कम 50 प्रतिशत दुकानों में बिहार के मूल व्यंजन, पारंपरिक मिठाइयां और स्थानीय स्नैक्स अनिवार्य रूप से उपलब्ध होंगे। इसका उद्देश्य बिहार के स्थानीय स्वाद और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।

फूड वेंडर्स को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

योजना के अंतर्गत चयनित फूड वेंडर्स को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के विशेषज्ञों द्वारा विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण में खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता, गुणवत्ता नियंत्रण, साफ-सुथरे तरीके से भोजन तैयार करने और ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करने जैसे विषय शामिल होंगे। इससे स्ट्रीट फूड की गुणवत्ता और विश्वसनीयता दोनों में सुधार आने की उम्मीद है।

केंद्र सरकार से मिलेगी वित्तीय सहायता

उल्लेखनीय है कि शहरी विकास व आवास विभाग द्वारा राज्य के विभिन्न नगर निकायों से इस प्रकार के प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। विभाग द्वारा चयनित प्रस्तावों को केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद संबंधित निकाय को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत लगभग चार करोड़ रुपए तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जायेगी। यदि यह योजना स्वीकृत होती है, तो पटना न केवल आधुनिक स्ट्रीट फूड संस्कृति का नया केंद्र बनेगा, बल्कि बिहार के पारंपरिक व्यंजनों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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