Garhwa News: झारखंड के गढ़वा ज़िले के खरौंधी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में शुक्रवार को स्वास्थ्य से जुड़ी एक बड़ी समस्या सामने आई। खबरों के अनुसार, दूषित खाना खाने और तेज़ गर्मी के कारण स्टोरेज टैंक में बहुत ज़्यादा गर्म हो चुका पानी पीने से 100 से ज़्यादा छात्राएं बीमार पड़ गईं। कई छात्राओं को उल्टी, पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया; कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।
दोपहर के खाने के बाद बीमार पड़ीं छात्राएं
खबरों के मुताबिक, शुक्रवार को दोपहर के खाने में छात्राओं को *पुआ* (मीठा पकवान) और चावल परोसा गया था। मुहर्रम की वजह से इलाके में बिजली न होने के कारण हॉस्टल की छत पर लगे टैंक का पानी बहुत ज़्यादा गर्म हो गया था। छात्राओं का आरोप है कि उन्हें यही पानी पीने के लिए मजबूर किया गया। शाम को मुर्मुरा (भुने हुए चावल) खाने के बाद भी पीने का पर्याप्त पानी नहीं दिया गया। इसके कुछ ही देर बाद, बड़ी संख्या में छात्राओं ने पेट दर्द, उल्टी, चक्कर आने और बेचैनी की शिकायत शुरू कर दी।
प्रबंधन पर भारी लापरवाही के आरोप
इस घटना के बाद छात्राओं और अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि छात्राओं के बीमार पड़ने के बाद भी मामले को दबाने की कोशिश की गई। आरोप है कि घटना के समय हॉस्टल में न तो वार्डन मौजूद थे और न ही अकाउंटेंट; पूरे हॉस्टल का प्रबंधन सिर्फ़ एक सुरक्षा गार्ड कर रहा था। परिवार वालों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें अपनी बेटियों से मिलने के लिए हॉस्टल के बाहर घंटों इंतज़ार करना पड़ा। हालात बिगड़ने पर पुलिस के दखल के बाद ही मुख्य गेट खोला गया।

देर रात अस्पताल पहुंचीं छात्राएं; कई की हालत गंभीर
हालात गंभीर होने पर छात्राओं को देर रात भवनाथपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। अस्पताल में 20 से ज़्यादा छात्राओं की हालत चिंताजनक बताई गई। बीमार छात्राओं में नैना, काजल, देवरानी कुमारी, रूपा कुमारी, विनीता कुमारी, रोशनी कुमारी और चंदा कुमारी शामिल हैं। इनमें से नैना और काजल की हालत सबसे ज़्यादा गंभीर बताई जा रही है।अस्पताल प्रशासन ने सभी छात्राओं का तुरंत इलाज शुरू कर दिया है और उन्हें ज़रूरी दवाएं व IV फ़्लूइड दिए जा रहे हैं।
प्रशासन ने दखल दिया; जांच शुरू
घटना की खबर मिलने पर, भवनाथपुर के BDO नंद जी राम और सर्कल ऑफिसर शंभू राम ने अस्पताल जाकर मेडिकल सुविधाओं का जायजा लिया। शुरुआती जांच में, मेडिकल ऑफिसर-इन-चार्ज डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने छात्रों के बीमार पड़ने की संभावित वजह फूड पॉइजनिंग और बहुत ज़्यादा गर्म पानी पीना बताया। उन्होंने कहा कि सभी छात्रों की हालत पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है और स्थिति अभी नियंत्रण में है।
अभिभावकों में आक्रोश; कार्रवाई की मांग
इस घटना से अभिभावकों और स्थानीय लोगों में काफी गुस्सा है। स्कूल मैनेजमेंट के कामकाज पर सवाल उठाते हुए, उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर छात्रों को समय पर और सही मेडिकल इलाज नहीं मिला होता, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी। अब सबकी नज़रें प्रशासनिक जांच और दोषी पाए जाने वालों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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