शराबबंदी कानून को मंत्री शीला मंडल ने बताया बड़ा आंदोलन जैसा, खैनी विवाद पर रखी बेबाक राय

बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच नीतीश सरकार की मंत्री और जेडीयू नेता शीला मंडल ने शराबबंदी को लेकर एक ऐसा बड़ा बयान दे दिया है, जिसकी चर्चा पूरे राजनीतिक गलियारे में हो रही है। मंत्री शीला मंडल ने शराबबंदी कानून की तुलना देश से खत्म की गई ऐतिहासिक कुप्रथा सती प्रथा से कर दी है। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सार्वजनिक मंचों पर खैनी खाने को लेकर उठ रहे सवालों पर भी उन्होंने अपनी बेबाक राय रखी है।

शराबबंदी कानून छोटी बात नहीं, सती प्रथा जैसा आंदोलन

मंत्री शीला मंडल ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि बिहार जैसी बड़ी आबादी वाले राज्य में शराबबंदी लागू करना और इस कानून को लगातार बचाए रखना कोई छोटी बात नहीं है। उन्होंने कहा है कि यह एक बहुत बड़ा और चुनौतीपूर्ण अभियान है, जिसे सिर्फ सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। इसे सफल बनाने के लिए राजनेताओं, पूरे समाज और आम लोगों के आपसी सहयोग की बेहद जरूरत है।

जेडीयू नेता ने आगे कहा कि सिर्फ कागजों पर कानून बना देना बड़ी बात नहीं होती, बल्कि उसे जमीन पर उतारना और समाज में प्रभावी तरीके से लागू करना सबसे जरूरी काम है। उन्होंने इतिहास का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह हमारे देश में सती प्रथा जैसी भयानक सामाजिक कुरीतियों को कानून और कड़े संकल्प के माध्यम से खत्म किया गया था, ठीक उसी तरह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की शराबबंदी ने भी बिहार के सामाजिक जीवन में एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव लाने का काम किया है।

शराबबंदी कानून से सुधरी महिलाओं की स्थिति

शीला मंडल ने दावा किया कि शराबबंदी लागू होने के बाद से बिहार में महिलाओं और गरीब परिवारों की स्थिति में अभूतपूर्व सुधार आया है। उन्होंने जमीन हकीकत बयां करते हुए कहा है किपहले के समय में शाम ढलते ही महिलाओं के लिए घर से बाहर निकलना दूभर हो जाता था। शराबी सड़कों पर हुड़दंग मचाते थे, जिससे बहन-बेटियां असुरक्षित महसूस करती थीं। लेकिन आज वो परेशानियां खत्म हो चुकी हैं। इसका सीधा और सकारात्मक फर्क हमारे समाज में साफ दिखाई देता है।

सम्राट चौधरी के ‘खैनी विवाद‘ पर दी सफाई

जब पत्रकारों ने मंत्री शीला मंडल से तीखा सवाल पूछा कि एक तरफ सरकार बिहार को पूरी तरह नशामुक्त बनाने की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ सूबे के सीएम सम्राट चौधरी खुद सार्वजनिक मंचों पर खैनी खाते हुए नजर आते हैं; क्या यह सरकार की कथनी और करनी में विरोधाभास नहीं है? क्या इससे समाज में नशे को बढ़ावा नहीं मिलता?

इस कड़े सवाल का जवाब देते हुए मंत्री शीला मंडल ने सीएम सम्राट चौधरी का बचाव किया। उन्होंने कहा कि खैनी और शराब में बड़ा अंतर है। खैनी पर अभी उस तरह का कानूनी प्रतिबंध लागू नहीं है जैसा कि शराब पर है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि नशामुक्ति के इस व्यापक अभियान को लेकर सरकार और समाज दोनों को लगातार मिलकर काम करना चाहिए, ताकि हर तरह के नशे को धीरे-धीरे खत्म किया जा सके।

शराबबंदी कानून की चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर 

मंत्री ने जोर देकर कहा कि तमाम चुनौतियों और विपक्ष के हमलों के बावजूद शराबबंदी का बिहार में व्यापक और गहरा प्रभाव दिखाई दे रहा है। आज पूरे देश में नीतीश सरकार के इस साहसिक फैसले की चर्चा और सराहना होती है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी से जुड़े मामलों, पुलिसिया कार्रवाई और सरकार द्वारा समय-समय पर कराए जा रहे सर्वेक्षणों और समीक्षाओं को लेकर वे खुद भी लगातार अपनी बात मुख्यमंत्री के सामने रखती रही हैं। सरकार कमियों को दूर करने और इस दिशा में प्रयासों को और मजबूत करने पर लगातार ध्यान दे रही है।

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