Ranchi Liquor Factory Raid: झारखंड की राजधानी रांची में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ आबकारी विभाग और पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन को बड़ी कामयाबी मिली है। ओरमांझी में शराब बनाने वाली एक प्राइवेट यूनिट पर देर रात की गई छापेमारी के बाद तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों का आरोप है कि फैक्ट्री में बनी शराब पर दूसरे राज्यों के मशहूर ब्रांड के नकली लेबल लगाकर उसे अवैध रूप से बेचने की योजना थी।
देर रात ऑपरेशन; तीन गिरफ्तार
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने मंगलवार देर रात ओरमांझी स्थित तरंगिनी लिक्वर्स प्राइवेट लिमिटेड पर छापेमारी की। ऑपरेशन के दौरान, कंपनी से जुड़े तीन लोगों को मौके से हिरासत में लिया गया। कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। छापेमारी कई घंटों तक चली और पूरी फैक्ट्री की बारीकी से जांच की गई।
अलग-अलग ब्रांड की शराब का बड़ा स्टॉक ज़ब्त
जांच के दौरान अधिकारियों ने अलग-अलग ब्रांड की भारी मात्रा में शराब बरामद की, जिसमें बीयर और व्हिस्की के कई कार्टन शामिल थे। शुरुआती जांच में पता चला कि कुछ बोतलों पर ऐसे लेबल लगे थे जो दूसरे राज्यों में बिक्री के लिए थे। अधिकारियों ने बताया कि ज़ब्त किए गए सामान की विस्तृत जांच की जा रही है और नतीजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
नकली लेबल और दस्तावेज़ इस्तेमाल करने के आरोप
आबकारी विभाग ने संकेत दिया कि फैक्ट्री में आधिकारिक तौर पर स्वीकृत ब्रांडों के अलावा अन्य ब्रांडों से मिलते-जुलते लेबल इस्तेमाल किए जा रहे थे। जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके दूसरे राज्यों में शराब की ढुलाई और सप्लाई को लेकर भी संदेह जताया गया है। जांच एजेंसियां इन कथित गतिविधियों से सरकारी राजस्व को हुए नुकसान का भी आकलन कर रही हैं।
निगरानी व्यवस्था पर सवाल
इस घटना ने आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मौजूदा नियमों के तहत, शराब बनाने वाली हर लाइसेंस प्राप्त यूनिट में विभाग के एक ‘बॉन्ड ऑफिसर’ की तैनाती ज़रूरी है। इसलिए, इस बात की जांच की जा रही है कि ये कथित अनियमितताएं कैसे जारी रहीं। अधिकारियों ने कहा कि मामले के सभी पहलुओं की व्यापक जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है। खबर है कि आबकारी विभाग ने पहले भी इस फैक्ट्री के खिलाफ कार्रवाई की है। इसलिए, हालिया छापेमारी के बाद जांच एजेंसियां पुराने मामलों और मौजूदा घटनाओं के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही हैं।
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