SAIL Bokaro News: डी-कार्बोनाइजेशन की दिशा में बड़ा कदम, बोकारो स्टील प्लांट में GHG Dashboard लॉन्च

SAIL Bokaro News: SAIL के बोकारो स्टील प्लांट (BSL) ने ग्रीनहाउस गैस (GHG) डैशबोर्ड लॉन्च किया है, जो पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ औद्योगिक विकास की दिशा में एक अहम कदम है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म प्लांट की अलग-अलग प्रोडक्शन यूनिट से होने वाले कार्बन उत्सर्जन की निगरानी, ​​विश्लेषण और प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने में अहम भूमिका निभाएगा। इस पहल को प्लांट की डीकार्बोनाइज़ेशन यात्रा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।

डिजिटल टेक्नोलॉजी के ज़रिए कार्बन उत्सर्जन की निगरानी

नया GHG डैशबोर्ड प्लांट की मुख्य प्रोडक्शन यूनिट से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लगभग रियल-टाइम विश्लेषण करने में मदद करता है। इससे उत्सर्जन के मुख्य स्रोतों की पहचान करना आसान हो जाता है और डेटा-आधारित निर्णय लेने में मदद मिलती है। यह सिस्टम प्रोडक्शन प्रोसेस को ज़्यादा कुशल और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में भी मददगार साबित होगा।

आधुनिक टेक्नोलॉजी और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित सिस्टम

अधिकारियों के अनुसार, यह डैशबोर्ड ERP/SAP-आधारित सिस्टम पर विकसित किया गया है जो कार्बन फुटप्रिंट का आकलन करने के लिए प्रोडक्शन से जुड़े डेटा का अपने आप विश्लेषण करता है। इसमें ग्रीनहाउस गैस प्रोटोकॉल, वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन की कार्यप्रणाली, कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) और कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) जैसे अंतरराष्ट्रीय मानक शामिल हैं। इससे पर्यावरणीय प्रदर्शन की ज़्यादा सटीक और पारदर्शी निगरानी सुनिश्चित होती है।

पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को मिलेगा बल

लॉन्च के मौके पर प्लांट मैनेजमेंट ने कहा कि डिजिटल टेक्नोलॉजी का प्रभावी इस्तेमाल भविष्य की औद्योगिक ज़रूरतों के हिसाब से पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मज़बूत करेगा। यह डैशबोर्ड ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, कार्बन उत्सर्जन कम करने और ग्रीन स्टील प्रोडक्शन को बढ़ावा देने में मदद करेगा। साथ ही, यह प्लांट की अलग-अलग यूनिट के प्रदर्शन का नियमित आकलन करने में भी आसानी करेगा।

हरित भविष्य की ओर एक अहम कदम

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इस तरह की तकनीकी पहल उद्योगों को पर्यावरणीय चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना करने में मदद करती है। बोकारो स्टील प्लांट का यह कदम न केवल आधुनिक औद्योगिक प्रबंधन को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत के जलवायु लक्ष्यों और टिकाऊ विकास में भी सकारात्मक योगदान देगा। उम्मीद है कि निकट भविष्य में, यह डिजिटल सिस्टम पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप प्रोडक्शन प्रोसेस को और भी प्रभावी बना देगा।

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