Bihar Cooperative Policy 2026: बिहार राज्य सहकारी नीति 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सहकारिता विभाग ने सहकारी अधिनियम और नियमावली में आवश्यक संशोधनों पर विचार शुरू कर दिया है। इसी सिलसिले में सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव की अध्यक्षता में केंद्रीय सहकारी बैंकों, पैक्स और शीर्ष सहकारी समितियों के अध्यक्षों एवं प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई। बैठक में सहकारी समितियों को अधिक स्वायत्त, लोकतांत्रिक, पारदर्शी और व्यावसायिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कई मुद्दों पर चर्चा की गयी। विभागीय अधिकारियों ने नीति के प्रावधानों के अनुरूप अधिनियम, नियमावली और उपविधियों में संभावित संशोधनों को लेकर प्रस्तुतीकरण दिया।
सदस्यता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को सरल बनाने पर चर्चा
बैठक में सहकारी समितियों की सदस्यता प्रक्रिया को आसान और प्रभावी बनाने पर विशेष चर्चा हुई। सदस्यता से जुड़े मामलों में अपील की प्रक्रिया को भी सुगम बनाने के सुझाव सामने आये। सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक नियंत्रण को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षण की बेहतर व्यवस्था पर भी विचार किया गया। बोर्ड के लोकतांत्रिक संचालन को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से अधिनियम की धारा 41(5) में संभावित संशोधन पर भी चर्चा हुई।
कर्मचारियों की नौकरी और वेतन से जुड़े मुद्दों पर भी मंथन
बैठक में सहकारी समितियों के कर्मचारियों से जुड़े विषय भी प्रमुखता से उठे। कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा और नियमित वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्था पर विचार किया गया। इसके अलावा कर्मचारियों के लिए न्यूनतम योग्यता तय करने और वैधानिक प्रावधानों के अनुपालन में देरी या उल्लंघन होने पर आर्थिक दायित्व तय करने संबंधी बदलावों पर भी चर्चा हुई। सहकारी समितियों के लाभ से तकनीकी विकास कोष बनाने और कमजोर समितियों के पुनरुद्धार के लिए विशेष सहकारी संरचना या समिति गठित करने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।
पैक्स के समय पर चुनाव और ऑडिट पर जोर
बैठक में सहकारी समितियों के जल्द भंग होने से जुड़े मौजूदा प्रावधानों की समीक्षा की जरूरत भी बतायी गयी। प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि आधे से अधिक सदस्यों के इस्तीफा देने पर समिति के भंग होने से जुड़े प्रावधान में आवश्यकतानुसार बदलाव किया जा सकता है। इसके साथ ही सहकारी समितियों, खासकर पैक्स के समय पर अंकेक्षण और चुनाव सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया गया। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में प्रभावी दंडात्मक और आर्थिक प्रावधानों पर भी चर्चा हुई।
पैक्स को सिर्फ पारंपरिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रखने पर जोर
सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने पैक्स में व्यवसाय के विविधीकरण और आय के नये स्रोत विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पैक्स को केवल पारंपरिक गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय संसाधनों, कृषि उत्पादों और बाजार की संभावनाओं के अनुरूप नये आर्थिक एवं व्यावसायिक कार्यों से जोड़ने की जरूरत है। उनके अनुसार, इससे पैक्स की आय बढ़ाने के साथ किसानों को स्थानीय स्तर पर बेहतर मूल्य और विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। सहकारी संस्थाओं के माध्यम से रोजगार, उद्यमिता और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देने की संभावनाओं पर जोर दिया गया।
दादर पैक्स के नवाचार की हुई सराहना
बैठक में विभिन्न पैक्स और सहकारी संस्थाओं की ओर से किये जा रहे नवाचारी कार्यों की भी सराहना की गयी। विशेष रूप से कैमूर जिले के दादर पैक्स द्वारा दादर नीर और सरसों तेल जैसे उत्पादों के निर्माण और विपणन की पहल को उदाहरण के तौर पर सराहा गया। मंत्री ने कहा कि इस तरह के प्रयास दूसरे पैक्स के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं। स्थानीय जरूरत और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर नये उद्यम विकसित कर सहकारी संस्थाओं को आर्थिक रूप से मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बिहार राज्य सहकारी नीति 2026 का उद्देश्य सहकारिता आंदोलन को अधिक मजबूत, लोकतांत्रिक, पारदर्शी, स्वायत्त और व्यावसायिक बनाना है। नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जहां आवश्यक होगा, वहां नियमसंगत संशोधन किये जाएंगे। साथ ही सहकारी संस्थाओं की जमीनी जरूरतों और प्रतिनिधियों के अनुभवों को ध्यान में रखकर व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा।

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