Bihar Liquor Ban: हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) की युवा शाखा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बिहार की शराबबंदी नीति पर एक बार फिर अपनी राय रखी। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से आग्रह किया कि वे बिहार में ‘गुजरात मॉडल’ की तर्ज पर शराबबंदी लागू करें। मांझी ने कहा कि शराबबंदी का कानून तो सही है, लेकिन इसे लागू करने के तरीके में सुधार की ज़रूरत है। केंद्रीय मंत्री ने पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून की आड़ में निर्दोष लोगों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए और प्रशासनिक व्यवस्था को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया।
गुजरात मॉडल के आधार पर शराबबंदी की मांग
जीतन राम मांझी ने कहा कि उन्होंने पहले भी बिहार में शराबबंदी पर अपनी राय रखी है। उनके अनुसार, शराब पर रोक लगाने का मकसद तो सही है, लेकिन कानून को लागू करने के तरीके में बदलाव की ज़रूरत है। गुजरात का उदाहरण देते हुए, जहाँ शराबबंदी लागू है, मांझी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से बिहार में भी वैसी ही व्यवस्था अपनाने का आग्रह किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बिहार में शराबबंदी को लेकर कुछ इलाकों के लोगों में निराशा है। उन्होंने प्रशासन से कानून को बेहतर ढंग से लागू करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
जीतन राम मांझी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए
मांझी ने शराबबंदी कानून के तहत पुलिस की कार्रवाई पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को कानून के बहाने मनमानी करने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री से प्रशासनिक व्यवस्था को मज़बूत करने का आह्वान करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि शराबबंदी कानून को सही ढंग से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि कानून लागू करने की कार्रवाई के दौरान निर्दोष लोगों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। मांझी ने सरकार को इस मुद्दे पर ज़रूरी कदम उठाने की सलाह दी। हालाँकि, उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की तारीफ़ भी की।
‘करीब 11 लाख लोग कानूनी मामलों में फंसे हैं’
जीतन राम मांझी ने बिहार में शराबबंदी कानून के तहत दर्ज मामलों का भी ज़िक्र किया। उन्होंने दावा किया कि राज्य में लगभग 11 लाख लोग शराब पीने से जुड़े कानूनी मामलों का सामना कर रहे हैं। मांझी के अनुसार, इनमें से लगभग 5 से 6 लाख लोग अनुसूचित जाति समुदाय से हैं। इन आंकड़ों का हवाला देते हुए, उन्होंने शराबबंदी कानून को लागू करने के तरीके पर सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि हालांकि कानून का मकसद नशे पर रोक लगाना है, लेकिन इसे इस तरह लागू किया जाना चाहिए कि निर्दोष लोगों को परेशानी न हो।
NDA में रहते हुए शराबबंदी का मुद्दा उठाना
जीतन राम मांझी पहले भी बिहार की शराबबंदी नीति पर अपनी राय जाहिर कर चुके हैं। NDA का हिस्सा रहते हुए भी, उन्होंने कई बार शराबबंदी कानून में बदलाव और इसे लागू करने के तरीके में सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि शराबबंदी कानून को लागू करने के दौरान अक्सर गरीब और निर्दोष लोग फंस जाते हैं। उन्होंने प्रभावशाली लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं। मांझी समय-समय पर ये बातें उठाते रहे हैं।
शराबबंदी नहीं हटाई जाएगी; CM सम्राट का रुख साफ
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहले ही बिहार में शराबबंदी को लेकर अपना रुख साफ कर चुके हैं। उन्होंने कहा है कि राज्य में शराबबंदी नहीं हटाई जाएगी और शराब पर पूरी तरह रोक लगाने वाला कानून लागू रहेगा। इस बीच, जीतन राम मांझी ने एक बार फिर मांग की है कि शराबबंदी को ‘गुजरात मॉडल’ की तर्ज पर लागू किया जाए। जहां सरकार प्रतिबंध जारी रखने पर जोर दे रही है, वहीं मांझी इसके लागू करने के तरीके में बदलाव और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की बात कर रहे हैं। फिलहाल, बिहार में सरकार और उसकी सहयोगी पार्टियों के नेताओं की ओर से शराबबंदी कानून को लेकर अलग-अलग सुझाव आने के कारण यह मुद्दा फिर से चर्चा में है।
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