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N Chandrasekaran Resigns: Tata Sons का अगला चेयरमैन कौन? N Chandrasekaran के फैसले से तेज हुई उत्तराधिकारी की तलाश

N Chandrasekaran Resigns: Tata Sons के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) ने अपने पद को लेकर बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने Tata Sons बोर्ड को जानकारी दी है कि वह 20 फरवरी 2027 को अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम पेश नहीं करेंगे। हालांकि, तब तक वह चेयरमैन के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे। चंद्रशेखरन के इस फैसले के बाद Tata Group में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। खास तौर पर Tata Sons और Tata Trusts के बीच पिछले कुछ समय से बोर्ड प्रतिनिधित्व, रणनीति और अन्य मुद्दों को लेकर सामने आए मतभेदों के बीच यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

1987 में TCS से शुरू हुआ था सफर

एन. चंद्रशेखरन वर्ष 1987 में Tata Group से जुड़े थे। उन्होंने Tata Consultancy Services (TCS) में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते हुए कंपनी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचे। वर्ष 2009 में वह TCS के CEO बने। इसके बाद वर्ष 2017 में उन्हें Tata Sons का चेयरमैन बनाया गया। वह Tata परिवार से बाहर के उन प्रमुख पेशेवर नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने समूह की शीर्ष जिम्मेदारी संभाली।

Tata Trusts के साथ मतभेद की भी रही चर्चा

चंद्रशेखरन के अगले कार्यकाल को लेकर फरवरी 2026 में फैसला टाल दिया गया था। कई मीडिया रिपोर्टों में इसकी वजह Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा की आपत्ति को बताया गया था। रिपोर्टों के मुताबिक, Tata Sons और Tata Trusts के बीच बोर्ड में प्रतिनिधित्व, समूह की आगे की रणनीति, कंपनी की लिस्टिंग और शापूरजी पल्लोनजी समूह से जुड़े मुद्दों को लेकर मतभेद रहे हैं। हालांकि, चंद्रशेखरन ने अपने फैसले के पीछे मुख्य रूप से Tata Sons के भविष्य के नेतृत्व में समय रहते स्पष्टता को जरूरी बताया है।

चंद्रशेखरन ने बोर्ड को क्या बताया?

एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि वह Tata Group में अपने करीब 40 साल के पेशेवर जीवन को पूरा कर चुके हैं। उनके मुताबिक, पिछले करीब एक दशक से Tata Sons का नेतृत्व करना उनके लिए सम्मान और बड़ी जिम्मेदारी रहा है। उन्होंने बताया कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने उनके पांच साल के अगले कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश की थी। यह प्रस्ताव Tata Sons की Nomination and Remuneration Committee और बोर्ड के समक्ष भी रखा गया था। हालांकि, एक बोर्ड सदस्य के समर्थन नहीं करने के कारण प्रस्ताव पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी और फैसला आगे नहीं बढ़ पाया। चंद्रशेखरन के मुताबिक, इस घटनाक्रम को करीब छह महीने बीत चुके हैं। उन्होंने कहा कि Tata Sons एक बड़ा संस्थान है और समूह की कई महत्वपूर्ण योजनाएं अहम चरण में हैं। ऐसे में फरवरी 2027 के बाद नेतृत्व को लेकर स्पष्टता जरूरी है। उन्होंने बोर्ड से समय रहते उत्तराधिकारी तय करने की अपील की है, ताकि नेतृत्व का सुचारु हस्तांतरण हो सके।

18 अगस्त की AGM पर भी रहेगी नजर

Tata Sons की 18 अगस्त को Annual General Meeting (AGM) प्रस्तावित है। इस बैठक को लेकर भी कारोबारी जगत की नजर बनी हुई है। Tata Sons में Tata Trusts की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है, इसलिए AGM में होने वाली वोटिंग में ट्रस्ट्स की भूमिका अहम मानी जाती है। कुछ ट्रस्टियों की AGM में शामिल होने की अनुमति से जुड़ी स्थिति को लेकर भी चर्चा है। चंद्रशेखरन के 2027 के बाद दोबारा चेयरमैन पद नहीं संभालने के फैसले के साथ अब Tata Group के अगले नेतृत्व को लेकर प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। फिलहाल उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 तक जारी रहेगा।

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