Sarath Circle Office: जाति प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र और पारिवारिक सूची बनवाने के नाम पर कथित तौर पर पैसे लिए जाने के विरोध में ग्रामीणों ने सोमवार को सारठ अंचल कार्यालय में जमकर हंगामा किया। ग्रामीणों का आरोप है कि एसआईआर नोटिस के मद्देनजर जरूरी दस्तावेज तैयार कराने के लिए आवेदन देने के बाद उनसे प्रति आवेदन 500 से 1000 रुपये तक लिए गए, लेकिन अब तक प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, उन्होंने करीब 15 दिन पहले संबंधित दस्तावेजों के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि कंप्यूटर ऑपरेटर शिलाजीत यादव ने प्रति आवेदन 500 से 1000 रुपये तक की राशि ली। ग्रामीणों का कहना है कि राशि लेने के बावजूद अब तक उन्हें प्रमाण पत्र नहीं मिल पाए हैं।
SIR नोटिस के बाद आवेदन देने का दावा

ग्रामीणों के अनुसार, एसआईआर नोटिस के मद्देनजर उन्हें जाति, आवासीय प्रमाण पत्र और पारिवारिक सूची जैसे दस्तावेज तैयार कराने की जरूरत थी। इसी वजह से उन्होंने करीब 15 दिन पहले अंचल कार्यालय में आवेदन दिया था। ग्रामीणों का आरोप है कि आवेदन के दौरान उनसे अलग-अलग राशि ली गई। किसी से 500 रुपये तो किसी से 1000 रुपये तक लिए जाने की बात कही गई है। हालांकि, पैसे लिए जाने और प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जाने से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित कर्मचारी का पक्ष भी इस मामले में सामने नहीं आ सका है।
सोमवार को SIR शिविर में जमा करने हैं कागजात

ग्रामीणों की परेशानी इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि सोमवार को आयोजित होने वाले एसआईआर शिविर में इन कागजातों को जमा करना अनिवार्य बताया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर प्रमाण पत्र नहीं मिलने की स्थिति में वे जरूरी दस्तावेज जमा नहीं कर पाएंगे। उन्हें आशंका है कि कागजात उपलब्ध नहीं होने से एसआईआर प्रक्रिया के दौरान उनका नाम सूची से हट सकता है। इसी आशंका को लेकर ग्रामीणों ने अंचल कार्यालय पहुंचकर अपनी नाराजगी जाहिर की और संबंधित मामले में कार्रवाई की मांग की।
अंचल कार्यालय में काफी देर तक हुआ हंगामा
प्रमाण पत्र नहीं मिलने और कथित तौर पर पैसे लिए जाने के विरोध में ग्रामीणों ने अंचल कार्यालय में जमकर हंगामा किया। ग्रामीणों ने संबंधित मामले की जांच कराने और जल्द से जल्द उनके दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन किया था और इसके बाद भी प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए। ऐसे में एसआईआर शिविर की समय-सीमा को देखते हुए उनके सामने परेशानी खड़ी हो गई है।
जिला स्तरीय बैठक में व्यस्त रहे CO
मामले को लेकर अंचलाधिकारी का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन वे जिला स्तरीय बैठक में व्यस्त थे। इस कारण उनसे संपर्क नहीं हो सका और मामले पर उनका पक्ष सामने नहीं आ पाया। अब ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रमाण पत्र बनवाने के लिए वास्तव में किसी तरह की राशि ली गई थी या नहीं और यदि राशि ली गई तो उसका आधार क्या था।
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