PM Fasal Bima Yojana: दो साल में 73 लाख किसानों ने छोड़ी फसल बीमा योजना, क्लेम में देरी और कम मुआवजा बड़ी वजह

 प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से दो साल में 73 लाख किसान बाहर हो गए। क्लेम के आकलन में गड़बड़ी, भुगतान में देरी और कम मुआवजा प्रमुख शिकायतें हैं।


PM Fasal Bima Yojana नई दिल्ली: किसानों को फसल खराब होने की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर बड़ा आंकड़ा सामने आया है। योजना स्वैच्छिक किए जाने के बाद किसानों की भागीदारी में लगातार कमी आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार महज दो साल में करीब 73 लाख किसान इस योजना से बाहर हो गए हैं। यह संख्या करीब 29.6 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाती है।

किसानों की सबसे बड़ी शिकायत फसल नुकसान के आकलन, बीमा क्लेम के भुगतान में देरी और वास्तविक नुकसान की तुलना में कम मुआवजा मिलने को लेकर है।

PM Fasal Bima Yojana: 2020 में स्वैच्छिक हुई योजना, इसके बाद घटने लगी भागीदारी

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना वर्ष 2016 में शुरू की गई थी। शुरुआत में अधिसूचित फसलों के लिए कर्ज लेने वाले किसानों के लिए बीमा कराना अनिवार्य था। फसल बेचने के बाद खाते में समर्थन मूल्य की राशि आते ही बैंक प्रीमियम की रकम काट लेते थे।

वर्ष 2020 में केंद्र सरकार ने योजना को स्वैच्छिक कर दिया। इसके बाद कई राज्यों में योजना से जुड़ने वाले किसानों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई। आंकड़ों के अनुसार खरीफ सीजन में 2024 में 2.47 करोड़ किसान योजना से जुड़े थे, जो 2025 में घटकर 2.01 करोड़ रह गए। 2026 में यह संख्या करीब 1.74 करोड़ बताई गई है।


Key Highlights

  • PM Fasal Bima Yojana से दो साल में 73 लाख किसान बाहर हुए।

  • किसानों की संख्या में करीब 29.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

  • क्लेम के आकलन और भुगतान में देरी प्रमुख शिकायतें हैं।

  • वास्तविक नुकसान के मुकाबले कम मुआवजा मिलने का भी आरोप है।

  • योजना के प्रचार-प्रसार पर 10 साल में 664 करोड़ रुपये खर्च हुए।


PM Fasal Bima Yojana: क्लेम के आकलन और भुगतान में देरी से किसान परेशान

योजना से किसानों के बाहर होने के पीछे क्लेम प्रक्रिया को लेकर असंतोष अहम कारण बताया जा रहा है। किसानों का आरोप है कि कई मामलों में फसल के वास्तविक नुकसान का सही आकलन नहीं होता। इसके अलावा क्लेम की राशि मिलने में भी लंबा समय लग जाता है।

कई किसानों को वास्तविक नुकसान की तुलना में कम मुआवजा मिलने की शिकायत है। ऐसे में किसान प्रीमियम देने के बावजूद योजना से मिलने वाले लाभ को लेकर आश्वस्त नहीं हैं।

आंकड़ों के मुताबिक खरीफ 2024 में किसानों ने 18,903 करोड़ रुपये का प्रीमियम दिया, जबकि 8,750 करोड़ रुपये के क्लेम का भुगतान हुआ। 2025 में प्रीमियम की राशि 12,834 करोड़ रुपये रही और क्लेम 8,061 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

PM Fasal Bima Yojana: 10 साल में प्रचार पर खर्च हुए 664 करोड़ रुपये

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रचार-प्रसार पर पिछले 10 वर्षों में 664 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके बावजूद योजना में किसानों की भागीदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

खरीफ 2026 के लिए फसल बीमा कराने की अंतिम तारीख 16 अगस्त तक थी। 20 अगस्त तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस सीजन में करीब 1.74 करोड़ किसानों ने बीमा कराया है। बीमित रकबा करीब 205.52 लाख हेक्टेयर रहा।

 

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