झारखंड में 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा विवाद पर 12 अक्टूबर को हाईकोर्ट में अहम सुनवाई होगी। अभ्यर्थियों ने उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन में गड़बड़ी की जांच की मांग की है।
JPSC रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 11वीं, 12वीं और 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सीआइडी जांच आगे बढ़ने के साथ मामले के अलग-अलग पहलू सामने आ रहे हैं। राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का दावा किया है, जबकि आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के बीच इस मामले को लेकर मतभेद उभर आये हैं। अभ्यर्थियों के एक धड़े का कहना है कि विवाद का मुख्य पहलू भ्रष्टाचार के आरोपों के बजाय मुख्य परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में निर्धारित नियमों और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की कथित अनदेखी है। इस बीच, 12 अक्टूबर को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।
JPSC परीक्षा विवाद: मूल्यांकन में गड़बड़ी पर हाईकोर्ट में सुनवाई की मांग
मुख्य परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में कथित गड़बड़ी को लेकर असफल अभ्यर्थियों की अपील पहले से ही झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ में लंबित है। अब अभ्यर्थियों का एक धड़ा मौजूदा विवाद की सुनवाई भी उसी खंडपीठ में कराने की मांग कर रहा है। इसके लिए अदालत में हस्तक्षेप याचिका (आईए) दायर की गयी है।
इस धड़े का तर्क है कि परीक्षा प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और एसओपी का पालन हुआ या नहीं, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अभ्यर्थियों के अनुसार, मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़े सवालों का न्यायिक परीक्षण जरूरी है, ताकि विवाद के सभी पहलुओं पर स्पष्टता आ सके।
Key Highlights
- 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा विवाद में 12 अक्टूबर को हाईकोर्ट में अहम सुनवाई।
- सीआइडी जांच के बीच परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
- अभ्यर्थियों के एक धड़े ने उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन में नियमों और एसओपी की कथित अनदेखी का मुद्दा उठाया।
- चयनित 342 अभ्यर्थियों ने ठोस साक्ष्य के बिना सभी सफल उम्मीदवारों पर सवाल उठाने का विरोध किया।
- नियुक्ति रद्द करने के सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक के बीच सुनवाई के नतीजे पर नजरें टिकी हैं।
JPSC: सरकार के दावों और साक्ष्यों पर भी उठ रहे सवाल
जेपीएससी परीक्षा विवाद में राज्य सरकार की ओर से अदालत में पेश किये गये तथ्यों को लेकर भी सवाल उठाये जा रहे हैं। सरकार ने 11 अभ्यर्थियों के दस्तावेज और कथित सेटिंग का हवाला दिया है। हालांकि, इस संबंध में लगाये गये आरोपों और उनके समर्थन में पेश साक्ष्यों की न्यायिक जांच महत्वपूर्ण होगी।
इसी बीच, ओएमआर शीट की स्कैनिंग से संबंधित एक कथित पत्र भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि पत्र की तारीख परिणाम घोषित होने के बाद की है। हालांकि, इस पत्र की प्रामाणिकता और इससे जुड़े तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
JPSC: चयनित 342 अभ्यर्थियों ने उठाये सवाल
परीक्षा में चयनित 342 अभ्यर्थियों का कहना है कि ठोस साक्ष्य के बिना सभी सफल उम्मीदवारों पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि किसी भी उम्मीदवार को लेकर निष्कर्ष निकालने से पहले आरोपों की पुष्टि जरूरी है। विवाद के कारण चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
फिलहाल, हाईकोर्ट ने नियुक्ति रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगा रखी है। ऐसे में 12 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस सुनवाई में सरकार की ओर से अपने दावों के समर्थन में पेश किये जाने वाले साक्ष्यों और अभ्यर्थियों की दलीलों पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।


















