Bihar Fertilizer Sale, पटना: बिहार में किसानों को उर्वरक की उपलब्धता और बिक्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल व्यवस्था लागू की जा रही है। कृषि विभाग ने उर्वरक की खरीद-बिक्री प्रक्रिया को ऑनलाइन और किसान-केंद्रित बनाने के लिए FSAS यानी Framework for Fertilizer Sale Application System विकसित किया है। इसमें iFMS और AgriStack को भी जोड़ा गया है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने 31 अगस्त को कृषि भवन सभागार, मीठापुर में ‘खेत बचाओ, गुणवत्तायुक्त बीज और खाद सुलभ कराओ’ विषय पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए नई व्यवस्था की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक समय पर और आसानी से उपलब्ध कराना कृषि विभाग की प्राथमिकता है।
Farmer ID से मिलेगी किसान की जानकारी
नई व्यवस्था के तहत जिन किसानों की भूमि संबंधी जानकारी Farmer Registry में उपलब्ध है, उनके आवश्यक विवरण Farmer ID के माध्यम से प्राप्त किए जाएंगे। वहीं, जिन किसानों की जानकारी Farmer Registry में उपलब्ध नहीं है, वे भी FSAS पर पंजीकरण कर उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए किसान को उस खेत का खाता और खेसरा संख्या, क्षेत्रफल तथा फसल से संबंधित जानकारी उपलब्ध करानी होगी, जिसके लिए उर्वरक की आवश्यकता है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर ICAR की अनुशंसाओं के अनुसार उर्वरक की आवश्यकता का आकलन किया जाएगा। इसके बाद किसान को एक QR Code उपलब्ध कराया जाएगा। यह QR Code तीन दिनों तक वैध रहेगा। किसान इसी QR Code में दर्ज अधिकृत उर्वरक विक्रेता से निर्धारित प्रक्रिया के तहत भुगतान कर खाद खरीद सकेंगे।
1 सितंबर से 19 जिलों में लागू होगी व्यवस्था
कृषि मंत्री के अनुसार डिजिटल उर्वरक बिक्री व्यवस्था का पायलट प्रोजेक्ट पहले वैशाली और शेखपुरा जिलों में शुरू किया गया था। इसके बाद इसे अन्य जिलों तक विस्तार दिया गया। अब 1 सितंबर से राज्य के 19 जिलों में यह व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके बाद 2 अक्टूबर से पूरे बिहार में डिजिटल उर्वरक बिक्री व्यवस्था लागू करने की योजना है। सरकार का उद्देश्य इस प्रणाली के माध्यम से उर्वरक के स्टॉक, उपलब्धता, वितरण और बिक्री की बेहतर निगरानी करना है। इससे बिक्री प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि उर्वरक की बिक्री निर्धारित मूल्य पर सुनिश्चित की जाए। निर्धारित कीमत से अधिक पर बिक्री, कालाबाजारी, जमाखोरी या किसी अन्य प्रकार की अनियमितता की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया है। उन्होंने जिला कृषि पदाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में नई डिजिटल व्यवस्था की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने का निर्देश दिया। साथ ही उर्वरक विक्रेताओं को नई प्रणाली की पूरी जानकारी देने और आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने को कहा गया। मंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल ऑनलाइन आंकड़ों के आधार पर निगरानी पर्याप्त नहीं होगी। अधिकारियों को क्षेत्र में जाकर उर्वरक की वास्तविक उपलब्धता और बिक्री व्यवस्था की भी नियमित जांच करनी होगी।
किसानों को तकनीकी परेशानी न हो, इस पर जोर
विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि डिजिटल व्यवस्था को केवल तकनीकी बदलाव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसका उद्देश्य किसानों को बेहतर सुविधा देना है। उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि नई तकनीक की वजह से किसी किसान को परेशानी न हो। किसानों को Farmer ID, FSAS पर पंजीकरण और उर्वरक प्राप्त करने की प्रक्रिया की जानकारी देने के लिए उचित सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि किसी भी तकनीकी या प्रशासनिक समस्या को लंबित नहीं रखा जाना चाहिए और उसका समयबद्ध समाधान किया जाना चाहिए।
पूरे बिहार में लागू होने से पहले प्रशिक्षण पर जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम में अधिकारियों से नई व्यवस्था को पूरी तरह समझने और इसके क्रियान्वयन के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं तथा सुझावों को साझा करने की अपील की गई। कृषि विभाग का कहना है कि डिजिटल प्रणाली का उद्देश्य उर्वरक बिक्री व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित और जवाबदेह बनाना है। साथ ही किसानों को निर्धारित मूल्य पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक आसानी से उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत किसान और उर्वरक विक्रेता दोनों को डिजिटल प्रक्रिया का पालन करना होगा। 1 सितंबर से 19 जिलों में शुरुआत के बाद इसके अनुभवों के आधार पर 2 अक्टूबर से इसे पूरे बिहार में लागू किया जाना प्रस्तावित है।



















