Bihar New Sugar Mills 2027, पटना: बिहार में चीनी उद्योग को बढ़ावा देने और नई चीनी मिलों की स्थापना की दिशा में राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई उच्चस्तरीय समिति की बैठक में गन्ना उद्योग से जुड़े विभिन्न मुद्दों की समीक्षा की गई। बैठक में मार्च 2027 तक नवादा, मुजफ्फरपुर के मोतीपुर और गोपालगंज के सासामूसा में नई चीनी मिल स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया। इसके साथ ही राज्य में अन्य संभावित स्थानों पर चीनी मिल स्थापना, जमीन की उपलब्धता और निवेश से जुड़े विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
गन्ना उत्पादक जिलों में जलजमाव के समाधान पर जोर
बैठक में गन्ना उत्पादक जिलों में जलजमाव की समस्या का स्थायी समाधान करने पर भी चर्चा हुई। इसके लिए जल संसाधन विभाग को बड़े स्तर पर परियोजना का डीपीआर तैयार करने का निर्देश दिया गया। गन्ना उद्योग विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से पिछली बैठकों में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की अद्यतन स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने राज्य में नई चीनी मिलों की स्थापना के लिए विभाग की ओर से की जा रही कार्रवाई के बारे में भी बताया। लौरिया और सुगौली चीनी मिल में प्रस्तावित परियोजनाओं की स्थापना को लेकर एचपीसीएल बायोफ्यूल्स लिमिटेड के साथ मुख्य सचिव स्तर पर बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया। बैठक में कृषि विभाग को बिहार में नीलगाय की समस्या के समाधान के लिए नई तकनीकों पर आधारित प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया गया।
सकरी और रैयाम में भी चीनी मिल स्थापना पर जोर
मधुबनी के सकरी और दरभंगा के रैयाम में चीनी मिल की स्थापना को लेकर भी बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इसके लिए इंडियन पोटाश लिमिटेड, गन्ना उद्योग विभाग और सहकारिता विभाग को मिलकर नई दिल्ली में केंद्रीय सहकारिता मंत्री के समक्ष प्रस्ताव रखने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री बिहार और केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष भी प्रस्तुत करने की बात कही गई। सकरी और रैयाम में चीनी मिल के लिए जमीन हस्तांतरण से संबंधित बिहार चीनी उपक्रम (अर्जन) (संशोधन) विधेयक की स्वीकृति को लेकर मुख्य सचिव स्तर से महाधिवक्ता से परामर्श लेने का निर्देश भी दिया गया।
बेगूसराय और पूर्णिया में जमीन होगी चिन्हित
नई चीनी मिलों की स्थापना के लिए जमीन की उपलब्धता को लेकर भी बैठक में विशेष ध्यान दिया गया। मोतिहारी, सारण और भागलपुर के जिलाधिकारियों को जमीन की उपलब्धता के संबंध में मुख्य सचिव स्तर से पत्र भेजने का निर्णय लिया गया। वहीं, बेगूसराय और पूर्णिया जिलों में प्राथमिकता के आधार पर उद्योग विभाग के साथ समन्वय कर चीनी मिल स्थापना के लिए उपयुक्त जमीन चिन्हित करने का निर्देश दिया गया। चकिया, पूर्वी चंपारण और वारिसलीगंज, नवादा में प्रस्तावित जमीन का तकनीकी मूल्यांकन और रिपोर्ट राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ लिमिटेड, नई दिल्ली के माध्यम से तैयार कराने का निर्देश दिया गया।
मोतीपुर और सासामूसा मिल को लेकर प्रक्रिया तेज
मुजफ्फरपुर के मोतीपुर चीनी मिल की जमीन वापस प्राप्त करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए वित्त विभाग से प्राप्त राशि को इंडियन पोटाश लिमिटेड को नियमानुसार हस्तांतरित करने का निर्देश गन्ना उद्योग विभाग को दिया गया। सासामूसा चीनी मिल की स्थापना के मामले में न्यायालय से प्राप्त आदेश के बाद निवेशक के साथ समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया। साथ ही हथुआ राज की जमीन के हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया।
निवेश प्रोत्साहन नीति में बदलाव की तैयारी
बैठक में बिहार गन्ना उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 की मार्गदर्शिका में भी सुधार करने का निर्देश दिया गया। इसमें जमीन की उपलब्धता और परियोजना मूल्यांकन से संबंधित प्रावधानों में बदलाव पर जोर दिया गया। परियोजनाओं के लिए कमिटेड अप्रूवल की व्यवस्था करने की बात भी कही गई। बैठक में वर्द्धन सीबीजी के प्रबंध निदेशक अमित कुमार सिंह ने बिहार के निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए सुझाव दिया कि जमीन की उपलब्धता और परियोजना मूल्यांकन के दौरान बिहार के निवेशकों को पांच अंक का अतिरिक्त वेटेज देने का प्रावधान किया जा सकता है। इस तरह सरकार की ओर से नई चीनी मिलों की स्थापना के साथ-साथ जमीन, निवेश, परियोजना मूल्यांकन और संबंधित प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।


















