Bihar Flood Shivraj Singh Chouhan, वैशाली: बिहार में बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच बाढ़ प्रभावित इलाकों में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के दौरे को लेकर ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं सामने रखीं। वैशाली के राघोपुर समेत प्रभावित इलाकों के लोगों ने कहा कि मुश्किल समय में सरकार और जनप्रतिनिधियों का सीधे उनके बीच पहुंचना जरूरी है। 17 सितंबर को सामने आई इस ग्राउंड रिपोर्ट में ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ के कारण उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने उम्मीद जताई कि प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति को अधिकारी और सरकार प्रत्यक्ष रूप से देखेंगे तो समस्याओं को समझने और उनके समाधान में मदद मिलेगी।
नाव, ट्रैक्टर और हवाई सर्वे से बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश के बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान 16 सितंबर को बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर पहुंचे थे। उनके साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, राज्य सरकार के मंत्री तथा केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम भी मौजूद थी। दौरे के दौरान मुंगेर जिले के नवागढ़ी और शीतलपुर स्थित इंटर स्तरीय उच्च विद्यालय के साथ सीताकुंड परिसर का निरीक्षण किया गया। इसके अलावा भागलपुर पॉलिटेक्निक परिसर में संचालित राहत शिविर का भी जायजा लिया गया। बाढ़ की स्थिति को समझने के लिए अलग-अलग स्थानों पर नाव और ट्रैक्टर का इस्तेमाल किया गया। वहीं कुछ इलाकों का हवाई सर्वे भी किया गया। इस दौरान प्रभावित परिवारों से बातचीत कर उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली गई।
शिवराज ने सुनी ग्रामीणों की समस्याएं, समाधान का भरोसा
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बाढ़ प्रभावित परिवारों से सीधे बातचीत की। उन्होंने लोगों से अपनी समस्याएं स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिलाधिकारी के सामने रखने की अपील की। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार संकट की इस घड़ी में बिहार के लोगों के साथ खड़ी है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत पहुंचाने के लिए केंद्र की ओर से वित्तीय और बुनियादी ढांचागत सहायता उपलब्ध कराने की बात कही। वहीं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावित परिवारों को दी जा रही सहायता की जानकारी दी। उनके अनुसार, 8.5 लाख से अधिक प्रभावित परिवारों को अनुग्रह राशि उपलब्ध कराई गई है और बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए 7,000 रुपये की अंतरिम अनुदान राशि जारी की गई है।

मुंगेर-भागलपुर के बीच 83 किलोमीटर सड़क का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री ने बताया कि मुंगेर और भागलपुर के बीच 83 किलोमीटर लंबी एट-ग्रेड सड़क का निर्माण किया जाएगा। उनके अनुसार, यह सड़क प्रोटेक्शन वॉल के रूप में भी काम करेगी और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि बाढ़ से हुए नुकसान का सटीक आकलन पूरा होने के बाद किसानों और अन्य प्रभावित परिवारों को नियमानुसार उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का जायजा लेने के लिए केंद्रीय टीम भेजे जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार भी जताया।

राहत शिविरों में भोजन और जरूरी सामान की व्यवस्था
16 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 12 राहत शिविर संचालित किए जा रहे थे। इन शिविरों में 10,353 लोगों के लिए रहने, भोजन, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा 784 सामुदायिक रसोई केंद्रों के संचालन की जानकारी दी गई, जहां अब तक 162.53 लाख थाली भोजन उपलब्ध कराने का दावा किया गया। राहत सामग्री के तहत 4.36 लाख पॉलीथिन शीट, 84,700 ड्राई राशन पैकेट और 1,400 फूड पैकेट वितरित किए जाने की जानकारी दी गई। पशुओं के लिए 17,731 क्विंटल पशुचारा बांटे जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। राहत एवं बचाव अभियान के लिए 1,156 नावों का परिचालन और त्वरित बचाव कार्य के लिए SDRF की 27 तथा NDRF की 10 टीमों की तैनाती बताई गई।
ग्रामीणों ने कहा- मुश्किल समय में सरकार का पहुंचना जरूरी
राघोपुर के ग्रामीण संतु दास ने कहा कि खराब परिस्थिति में सरकार का जनता के बीच पहुंचना जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दौरे के दौरान ग्रामीण अपनी परेशानियां सीधे सरकार तक पहुंचा सकेंगे। बिटी देवी ने कहा कि सरकार को अपने बीच देखकर अच्छा लगा और ग्रामीण अपनी समस्याएं बताना चाहते हैं। सरायपुर, वैशाली के चंदन कुमार ने जिला प्रशासन के कामकाज का उल्लेख करते हुए कहा कि बाढ़ से हुए नुकसान को सरकार प्रत्यक्ष रूप से देखेगी तो स्थिति को बेहतर तरीके से समझ सकेगी। भागलपुर के संतोष कुमार ने भी सरकार के लोगों के बीच पहुंचने को शासन की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। ग्रामीणों के इन बयानों से साफ है कि बाढ़ जैसी आपदा के बीच प्रभावित परिवार प्रशासन और सरकार से राहत के साथ-साथ अपनी समस्याओं के प्रत्यक्ष समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।
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