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Gayaji Pitru Paksha Mela 2026: गयाजी में 17 दिवसीय पितृपक्ष मेले की तैयारी पूरी, 20 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद

Gayaji Pitru Paksha Mela 2026: विश्व प्रसिद्ध 17 दिवसीय पितृपक्ष मेले की तैयारियां गयाजी और पुनपुन में पूरी कर ली गई हैं। 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस धार्मिक मेले का उद्घाटन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 25 सितंबर को गयाजी में करेंगे। देश-विदेश से आने वाले लाखों पिंडदानियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बार पारंपरिक व्यवस्थाओं के साथ आधुनिक डिजिटल सुविधाओं को भी शामिल किया गया है। श्रद्धालुओं को पिंडदान, आवासन, यातायात, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी जानकारी आसानी से मिल सके, इसके लिए ‘पिंडदान गया जी’ मोबाइल ऐप और आधिकारिक वेबसाइट लॉन्च की गई है।

एक क्लिक पर मिलेगी पिंडदान और मेले की जानकारी

‘पिंडदान गया जी’ ऐप और वेबसाइट पर पिंडदान की विभिन्न वेदियों, धार्मिक अनुष्ठानों, पंडा-पुरोहितों, आवासन, यातायात, पार्किंग और स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराई गई है। श्रद्धालु मेले में पहुंचने से पहले ही वेदी स्थलों, दैनिक कर्मकांड, धार्मिक महत्व और यात्रा मार्ग की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। ऐप में आपातकालीन सेवाओं और डिजिटल खोया-पाया सुविधा को भी शामिल किया गया है। गयाजी में वर्तमान में 54 वेदी स्थलों पर पिंडदान का विधान किया जाता है। इनमें विष्णुपद मंदिर परिसर में स्थित 19 वेदियां भी शामिल हैं। इसके अलावा गयासिर, गयाकूप, फल्गु नदी, सीताकुंड, रामगया, प्रेतशिला, रामशिला, अक्षयवट, बोधगया और मां मंगला गौरी जैसे प्रमुख स्थल भी पिंडदानियों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

ऑनलाइन पंजीकरण और ठहरने की सुविधा

डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए पिंडदानी अपनी यात्रा की योजना पहले से तैयार कर सकेंगे। ऐप और वेबसाइट पर टेंट सिटी, सरकारी आवासन, होटल, गेस्ट हाउस और धर्मशालाओं से जुड़ी जानकारी उपलब्ध होगी। इन स्थानों की क्षमता, उपलब्धता और संपर्क नंबर भी डिजिटल माध्यम से देखे जा सकेंगे। इस वर्ष श्रद्धालुओं के लिए 2500 बेड की टेंट सिटी तैयार की गई है। यहां सूचना केंद्र और हेल्पलाइन की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। श्रद्धालुओं की सहायता के लिए प्रशिक्षित पर्यटक गाइड भी तैनात किए गए हैं, ताकि बाहर से आने वाले लोगों को पिंडदान और स्थानीय व्यवस्थाओं से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने में परेशानी न हो।

ट्रेन, फ्लाइट और स्थानीय परिवहन की जानकारी

‘पिंडदान गया जी’ ऐप पर रेलवे की समय-सारणी, हवाई कनेक्टिविटी और स्थानीय परिवहन से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी। श्रद्धालु प्रमुख मार्गों, पार्किंग स्थलों और स्थानीय परिवहन के विकल्पों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। प्रीपेड ऑटो-टैक्सी, ई-रिक्शा और बसों के निर्धारित किराये की सूची भी ऐप पर उपलब्ध रहेगी। इसके साथ ही शौचालय, पेयजल केंद्र, स्वास्थ्य शिविर और पुलिस कैंप की लोकेशन भी देखी जा सकेगी। पुलिस, अस्पताल, एंबुलेंस और हेल्पलाइन नंबरों को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शामिल किया गया है।

बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त ई-रिक्शा

मेले में वृद्ध, बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए निःशुल्क ई-रिक्शा की विशेष व्यवस्था की गई है। यह सुविधा चांद चौरा चौक से विष्णुपद और विष्णुपद से बंगाली आश्रम तक उपलब्ध रहेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे श्रद्धालुओं को राहत देना है, जिन्हें भीड़भाड़ वाले मेला क्षेत्र में पैदल चलने या लंबी दूरी तय करने में कठिनाई हो सकती है।

एआई ट्रांसलेटर से दूर होगी भाषा की परेशानी

मेले में बनाए गए ‘मे आई हेल्प यू’ काउंटरों पर एआई आधारित गूगल ट्रांसलेटर की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इससे दूसरे राज्यों और विदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं को भाषा संबंधी समस्याओं से राहत मिल सकेगी। मोबाइल ऐप में एआई हेल्प डेस्क की सुविधा भी दी गई है। इसके माध्यम से श्रद्धालु पिंडदान, यात्रा और मेले की व्यवस्थाओं से जुड़े सवालों के जवाब प्राप्त कर सकेंगे।

सीसीटीवी, ड्रोन और कैमरों से होगी निगरानी

मेला क्षेत्र में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन और वीडियो कैमरों से निगरानी की जाएगी। बेहतर प्रशासनिक नियंत्रण के लिए पूरे मेला क्षेत्र को पांच जोन और 54 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। साफ-सफाई के लिए तीन पालियों में विशेष सफाईकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

फल्गु घाटों और वेदी स्थलों पर बढ़ाई गई सुविधाएं

पितृपक्ष मेले के दौरान फल्गु नदी के घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पिंडदान करते हैं। गयाजी डैम बनने के बाद फल्गु नदी में पानी की उपलब्धता में सुधार हुआ है। देवघाट और आसपास के घाटों के चौड़ीकरण से श्रद्धालुओं को कर्मकांड के लिए पहले की तुलना में अधिक स्थान मिल सकेगा। विष्णुपद मंदिर परिसर के अलावा गयासिर, गयाकूप, भीमगया, आम्रसिंचन सहित कई वेदी स्थलों की व्यवस्थाओं को भी दुरुस्त किया गया है।

बिजली व्यवस्था को लेकर भी विशेष तैयारी

मेला क्षेत्र में सुरक्षित और निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए 10 ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई गई है। इसके साथ ही मेला क्षेत्र के तारों को कवर्ड किया गया है। सभी बिजली पोल पर डायइलेक्ट्रिक पेंट किया गया है और तकनीकी कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। मेला क्षेत्र में तैनात अधिकारियों और कर्मियों को वॉकी-टॉकी दिए गए हैं। बिजली के पोल पर करंट की जांच के लिए अलग उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं। बैजनाथ बैठक में विद्युत विभाग का कंट्रोल रूम भी विकसित किया गया है।

पुनपुन में पांच हजार क्षमता वाला पंडाल

गयाजी के साथ पुनपुन में भी पिंडदानियों के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पुनपुन घाट पर पांच हजार लोगों की क्षमता वाला विशाल पंडाल तैयार किया गया है। यहां पिंडदान, पूजा-अनुष्ठान, पेयजल, शौचालय, प्रकाश, स्वच्छता, स्वास्थ्य और सुरक्षा की व्यवस्था रहेगी। सूचना केंद्र, हेल्पलाइन, गाइड, यातायात और पार्किंग की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। श्रद्धालुओं के लिए विशेष पिंडदान पैकेज की व्यवस्था की गई है, जिसमें परिवहन, पूजा सामग्री, पिंडदान कर्मकांड, भोजन और आवासन जैसी सुविधाएं एक साथ मिल सकेंगी।

20 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद

17 दिवसीय पितृपक्ष मेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। गयापाल तीर्थपुरोहितों के अनुसार, मेले के पहले दिन ही एक लाख से अधिक पिंडदानियों के आने की उम्मीद है। मेले के समापन तक यह संख्या 20 लाख से अधिक पहुंच सकती है। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने पारंपरिक इंतजामों के साथ डिजिटल सुविधाओं पर भी जोर दिया है। आधिकारिक ऐप और वेबसाइट के माध्यम से पिंडदानी यात्रा, आवासन, पिंडदान, परिवहन, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं की जानकारी पहले से प्राप्त कर सकेंगे।

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