CJI Surya Kant Victim Rights Centre, पटना: न्याय पाने के लिए किसी व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया की जटिलताओं और अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें, इस दिशा में बिहार में एक नई पहल शुरू हुई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने शनिवार को पटना स्थित बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (BSLSA) के कार्यालय में Victim Rights Centre और Transgender Helpline की शुरुआत की। देश का यह पहला Victim Rights Centre एक सिंगल-विंडो व्यवस्था के रूप में काम करेगा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि न्याय प्रक्रिया सहज और सुलभ होनी चाहिए और सभी वर्गों के लिए न्याय व्यवस्था समान होनी चाहिए। खासतौर पर गरीब और कमजोर तबके के लोगों तक न्याय की पहुंच आसान बनाना जरूरी है।
एक जगह मिलेगी पीड़ितों को कानूनी जानकारी और सहायता
Victim Rights Centre का उद्देश्य अपराध के पीड़ितों को उनके कानूनी अधिकारों और उपलब्ध सहायता की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है। इसके जरिए पीड़ितों को अलग-अलग संस्थानों के बीच भटकने के बजाय एक ही जगह से जरूरी सहायता और मार्गदर्शन मिलने की व्यवस्था की गई है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि यह केंद्र गरीब पीड़ितों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उनके मुताबिक, किसी पीड़ित को अकेला महसूस नहीं होना चाहिए और उसे न्याय पाने की प्रक्रिया में असहाय स्थिति का सामना नहीं करना चाहिए। यह केंद्र पीड़ितों के मामलों से जुड़े दस्तावेजीकरण और उपलब्ध कानूनी सहायता तक पहुंच बनाने में भी मदद करेगा। मौजूदा व्यवस्था में पुलिस, अस्पताल, अदालत और अन्य विभागों से जुड़ी प्रक्रियाओं के बीच पीड़ितों को कई स्तरों पर जाना पड़ सकता है। नया केंद्र इन सेवाओं तक पहुंच को अधिक समन्वित बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
Transgender Helpline भी शुरू, अधिकारों की जानकारी मिलेगी
कार्यक्रम में Transgender Helpline की भी शुरुआत की गई। CJI सूर्यकांत ने कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय के कानूनी अधिकारों और न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराने में यह हेल्पलाइन उपयोगी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल सामान्य कॉल सेंटर की तरह काम करने तक सीमित नहीं होगी। इसके माध्यम से जरूरतमंद लोगों को कानूनी प्रक्रिया और अपने अधिकारों से जुड़ी जानकारी हासिल करने में मदद मिलेगी। BSLSA की इस पहल को कमजोर और संवेदनशील समुदायों तक न्यायिक सहायता पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

जस्टिस वी. कामेश्वर राव बोले- मुकदमे के दूसरे पहलुओं पर भी ध्यान जरूरी
पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव ने कहा कि किसी मुकदमे, खासकर आपराधिक मामले में जांच, ट्रायल और फैसला महत्वपूर्ण चरण होते हैं। लेकिन इनके अलावा भी ऐसे कई पहलू हैं, जिन पर ध्यान देने की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चलने या सजा होने का असर केवल संबंधित व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। उसके परिवार पर भी आर्थिक और सामाजिक प्रभाव पड़ सकता है। वहीं लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया से गुजरने वाले व्यक्ति को कई दूसरी तरह की सहायता की आवश्यकता हो सकती है। उन्होंने कहा कि बच्चों, बुजुर्गों और ट्रांसजेंडर लोगों समेत जरूरतमंद वर्गों को कानूनी सहायता के साथ अन्य जरूरी सहयोग उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है।

जस्टिस सुधीर सिंह ने बताया अहम पहल
BSLSA के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुधीर सिंह ने कहा कि Victim Rights Centre और हेल्पलाइन जैसे प्रयासों से संस्थान की क्षमता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि न्याय तभी सार्थक है, जब वह जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने इस परियोजना की परिकल्पना और इसे आकार देने में पटना हाईकोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता शमा सिन्हा की भूमिका की सराहना की। शमा सिन्हा ने कहा कि गरीब, SC, ST, बच्चे, बुजुर्ग और महिलाओं को कानूनी सहायता के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी। केंद्र के माध्यम से स्वास्थ्य, पुलिस, मनोवैज्ञानिक सहायता और अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचेगी कानूनी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान CJI सूर्यकांत और अन्य अतिथियों ने बहुउपयोगी वाहनों को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इन वाहनों का उद्देश्य दूर-दराज के इलाकों में जाकर लोगों को कानून, उनके अधिकारों और उपलब्ध कानूनी सहायता के बारे में जानकारी देना है। Victim Rights Centre को फिलहाल पटना जिले में एक साल के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में संचालित किया जा रहा है। इसके अनुभव और मूल्यांकन के बाद इसे राज्य के अन्य जिलों तक विस्तार देने का प्रस्ताव है। कार्यक्रम में पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश, रजिस्ट्रार और अन्य न्यायिक अधिकारी भी मौजूद रहे।


















