Hemant Soren Bargai Land Case: बड़गाईं जमीन मामले में हेमंत सोरेन पर आरोप गठित, PMLA कोर्ट में ट्रायल शुरू

Hemant Soren Bargai Land Case: बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ विशेष PMLA अदालत में आरोप गठित किए जाने का अपडेट सामने आया है। अदालत की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मौजूद रहे। आरोप सुनाए जाने पर हेमंत सोरेन ने इन्हें गलत बताते हुए खुद को निर्दोष बताया। इस मामले में आरोप गठन के बाद अब मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ने का रास्ता खुल गया है। इससे पहले विशेष अदालत में आरोप गठन की प्रक्रिया को लेकर सुनवाई चल रही थी और 30 सितंबर को इस बिंदु पर कार्यवाही निर्धारित थी।

कोर्ट में हेमंत सोरेन ने आरोपों को बताया गलत

अदालत में आरोप गठन की प्रक्रिया के दौरान विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार ने अभियोजन पक्ष यानी ईडी की ओर से लगाए गए आरोप मुख्यमंत्री को पढ़कर सुनाए। इसके जवाब में हेमंत सोरेन ने कोर्ट के समक्ष कहा कि उन पर लगाए गए सभी आरोप गलत हैं और वह निर्दोष हैं। अधिवक्ता संजय कुमार के अनुसार, आरोप गठन के बाद अब मामले में ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री की ओर से अधिवक्ता संजीव सहाय ने बताया कि अदालत ने अभियोजन पक्ष को गवाह पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को होने की बात कही गई है। इस मामले में मुख्यमंत्री समेत कुल 17 आरोपियों के खिलाफ आरोप गठित किए जाने की जानकारी दी गई है।

Hemant Soren Bargai Land Case:  8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है पूरा मामला

यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। ईडी की जांच में जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण, दस्तावेजों में कथित हेरफेर और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों की जांच की गई है। इस मामले में ईडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत कई आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है। इससे पहले विशेष PMLA अदालत अन्य आरोपियों के खिलाफ भी आरोप गठित कर चुकी है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक 16 अन्य आरोपियों के खिलाफ पहले ही आरोप गठन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अदालत में आरोप गठित होना दोष सिद्ध होना नहीं है। मामले की ट्रायल प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष को अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य और गवाह पेश करने होंगे, जबकि बचाव पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।

हाईकोर्ट में भी चल रही है हेमंत सोरेन की याचिका

इधर, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में भी याचिका दाखिल की गई है। इसमें विशेष PMLA अदालत में आरोप गठन की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एमएस सोनक की खंडपीठ ने ईडी को सप्लीमेंट्री एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका की मेंटेनेबिलिटी यानी सुनवाई योग्य होने के सवाल पर अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को प्रस्तावित है।

मुख्यमंत्री की ओर से दाखिल याचिका में PMLA की धारा 44(1)(d) की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई है। याचिका में यह दलील दी गई है कि विशेष अदालत में PMLA के तहत ट्रायल की प्रक्रिया सामान्य सेशन कोर्ट में होने वाले आपराधिक मुकदमे की तरह संचालित होनी चाहिए।

निचली अदालत की कार्यवाही पर हाईकोर्ट की टिप्पणी

हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि केवल हाईकोर्ट में किसी मामले की सुनवाई लंबित होने के आधार पर निचली अदालत से राहत नहीं ली जा सकती। इससे बड़गाईं जमीन मामले में निचली अदालत की कार्यवाही और हाईकोर्ट में लंबित याचिका, दोनों अलग-अलग स्तरों पर आगे बढ़ रही हैं। इस मामले में हेमंत सोरेन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस. नागामुथु ने पक्ष रखा। वहीं ईडी की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ASGI एस.वी. राजू, वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने पक्ष रखा।

अब मामले में ट्रायल की दिशा में आगे की कार्रवाई विशेष PMLA अदालत में होगी, जबकि आरोप गठन और PMLA की धारा 44 से जुड़े कानूनी सवालों पर हाईकोर्ट में सुनवाई जारी रहेगी।

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